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अंबेडकर जयंती पर अखिलेश यादव का संदेश: ‘सामाजिक न्याय के राज’ से ही संविधान का सम्मान संभव

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 14अप्रैल: 2025,

सपा प्रमुख ने कहा—‘पीडीए समाज’ को शिक्षित, संगठित और सशक्त बना कर ही होगा सामाजिक परिवर्तन

अंबेडकर जयंती के अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सामाजिक न्याय की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर लिखा कि आज के समय में ‘न्याय के राज’ की स्थापना के लिए ‘सामाजिक न्याय के राज’ की आवश्यकता है।

संविधान की आत्मा है सामाजिक न्याय

अखिलेश यादव ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से शोषित, दलित और वंचित समाज को न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने न केवल मौलिक अधिकारों की रक्षा की, बल्कि सरकार की शक्तियों को सीमित करके लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत की।

उन्होंने लिखा, “सामाजिक न्याय के राज की स्थापना का मतलब है समता, समानता और बराबरी के सिद्धांतों को सच में लागू करना। इससे न केवल नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होगी, बल्कि मनमर्जी की राजनीति का अंत होगा और देश संविधान से चलेगा, मन-विधान से नहीं।”

शिक्षा और आर्थिक सुधार को बताया प्रमुख हथियार

सपा प्रमुख ने शिक्षा और आर्थिक सुधार को सामाजिक न्याय का आधार बताया। उन्होंने कहा कि ‘पीडीए समाज’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को शिक्षित और आर्थिक रूप से साक्षर बनाना आवश्यक है ताकि कोई भी उनके अधिकारों का हनन न कर सके।

“शिक्षा आत्म-सशक्तीकरण का जरिया बनेगी और आर्थिक साक्षरता समाज को आत्मनिर्भर बनाएगी। जब समाज के अंतिम व्यक्ति को भरोसा होगा कि सामाजिक न्याय उसके साथ है, तभी वह राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकेगा।”

‘पीडीए’ को कानूनी सुरक्षा देने पर बल

अखिलेश यादव ने आह्वान किया कि ‘पीडीए समाज’ को कानूनी रूप से भी सशक्त किया जाए। उन्होंने कहा, “हर थाने, हर अदालत में पीड़ितों के साथ खड़े होकर उनका हौसला बढ़ाना होगा। जब उत्पीड़न करने वालों को लगेगा कि पीडीए समाज एकजुट है, तब वे अत्याचार करने से पहले सोचेंगे।”

वर्चस्ववादी राजनीति के ख़िलाफ़ एकजुट होने की अपील

अखिलेश ने वर्तमान शासन व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि आज वर्चस्ववादियों के अन्याय और भेदभावपूर्ण शासन के कारण सामाजिक असमानता और अपमान चरम पर है। ऐसे समय में सामाजिक न्याय की लड़ाई और भी ज़रूरी हो गई है।

संविधान को मूल भावना से लागू करने की आवश्यकता

उन्होंने लिखा, “हमें संविधान को उसकी मूल भावना और मूल्यों के साथ लागू करने की ज़रूरत है। ‘पीडीए समाज’ को अपनी एकता की ताक़त दिखानी होगी और सामाजिक सुधारों की शुरुआत स्वयं से करनी होगी।”

‘सामाजिक न्याय का राज’ ही है भविष्य की गारंटी

अखिलेश यादव ने अंत में कहा कि “हमें अपना भविष्य खुद बनाना होगा। ‘सामाजिक न्याय का राज’ ही ‘पीडीए समाज’ के स्वाभिमान और सम्मान का नया सवेरा लाएगा। यही सच्ची देशभक्ति है।”

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