हिन्दुस्तान मिरर | 3 जुलाई 2025
नई दिल्ली : देश में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बुधवार को सी-फ्लड नामक वेब आधारित बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली की शुरुआत की। यह अत्याधुनिक प्रणाली गांव स्तर तक दो दिन पहले ही बाढ़ की चेतावनी देने में सक्षम होगी।
इस प्रणाली को केंद्रीय जल आयोग (CWC), सी-डैक (C-DAC) और नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत संचालित राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के अंतर्गत प्रारंभ किया गया है।
श्री पाटिल ने इस पहल को “भारत की बाढ़ प्रबंधन यात्रा में एक परिवर्तनकारी कदम” करार दिया। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि बाढ़ अध्ययन के लिए एक राष्ट्रीय योजना तैयार की जाए और इसे देश के सभी प्रमुख नदी बेसिनों तक विस्तार दिया जाए।
फिलहाल यह प्रणाली महानदी, गोदावरी और तापी नदी बेसिन के लिए 2-डी हाइड्रोडायनामिक मॉडल के माध्यम से वास्तविक समय में जलस्तर और बाढ़ मानचित्र का पूर्वानुमान प्रदान कर रही है।
मंत्री पाटिल ने इस पूर्वानुमान प्रणाली को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन आपातकालीन प्रतिक्रिया पोर्टल से जोड़ने की भी बात कही ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत और सटीक जानकारी मिल सके। साथ ही, उन्होंने उपग्रह व जमीनी स्तर के सत्यापन के जरिए सिस्टम की सटीकता को बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने जल संसाधनों के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकों के उपयोग को लेकर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी चर्चा की है।
इस बीच, केंद्रीय जल आयोग ने जानकारी दी है कि देशभर के 11 नदी निगरानी केंद्रों पर जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अभी कहीं भी जलस्तर खतरे या अत्यधिक बाढ़ की सीमा तक नहीं पहुंचा है।
निष्कर्षतः, सी-फ्लड प्रणाली बाढ़ प्रबंधन के क्षेत्र में भारत के लिए एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है, जो न केवल समय रहते चेतावनी देगी, बल्कि गांव-गांव तक लोगों को सुरक्षित करने में अहम भूमिका निभाएगी।