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ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का एक्सिओम-4 मिशन आज ISS से अनडॉक होगा, 15 जुलाई को धरती पर वापसी

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:14 जुलाई 2025

नई दिल्ली/लखनऊ, 14 जुलाई:
भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का ऐतिहासिक एक्सिओम-4 मिशन (Axiom-4) आज, 14 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से अनडॉक होने वाला है। भारतीय समयानुसार शाम 4:35 बजे चालक दल ISS से पृथ्वी की ओर प्रस्थान करेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो 15 जुलाई, मंगलवार को शाम 3 बजे उनका स्पेसक्राफ्ट कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में लैंड करेगा।


भारत के बेटे की अंतरिक्ष से वापसी

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारतीय वायु सेना के पहले ऐसे अफसरों में हैं, जिन्होंने एक निजी स्पेस मिशन के माध्यम से अंतरिक्ष की यात्रा की। उनका मिशन Axiom Space के तहत नासा के सहयोग से संचालित किया गया। इस मिशन के दौरान उन्हें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर विभिन्न प्रयोगों और गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला।


लखनऊ में परिवार कर रहा इंतजार

लखनऊ स्थित उनके घर में इस पल का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। उनके पिता शंभू दयाल शुक्ला ने एएनआई से बातचीत में बताया कि,

“हमने भगवान शिव से प्रार्थना की है कि शुभांशु सुरक्षित धरती पर लौट आएं। हम बहुत उत्साहित हैं और उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। यह हमारे लिए गौरव और सौभाग्य की बात है।”

उन्होंने यह भी बताया कि परिवार ने आज सुबह मंदिर जाकर विशेष पूजा की और घर पर भी पूजा-अर्चना की गई।


मां की भावुक प्रतिक्रिया

शुभांशु की मां आशा शुक्ला ने कहा,

“हम बेहद भावुक हैं। हमारा बच्चा 17-18 दिन बाद वापस आ रहा है। यदि संभव होता, तो हम अभी उससे मिलने दौड़ पड़ते। आज भगवान शिव का खास दिन है और हमने सुबह से उनकी पूजा की। हमने भोलेनाथ से सिर्फ एक ही प्रार्थना की – हमारा बच्चा सुरक्षित वापस आ जाए।”


परिवार को है बेटे पर गर्व

शंभू दयाल शुक्ला ने गर्व से कहा,

“हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा बेटा इतना ऊंचा जाएगा। आज पूरा देश उसके नाम को जानता है। यह हमारे लिए गर्व और सौभाग्य की बात है कि हमारे घर ऐसा बेटा जन्मा।”


मिशन का महत्व

Axiom-4 मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग करना, निजी स्पेसफ्लाइट को बढ़ावा देना और भविष्य की अंतरिक्ष यात्रा के लिए आधार तैयार करना था। यह मिशन न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्कि भारत के लिए भी ऐतिहासिक रहा, क्योंकि इसमें एक भारतीय वायु सेना अधिकारी की भागीदारी हुई।

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