हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
नेपाल और फ्रांस दोनों देशों में इस समय हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों जगह सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें जनता का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है।
फ्रांस की स्थिति
इसी बीच फ्रांस में भी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ गुस्सा भड़क उठा है। बजट कटौती और नई सरकार की नीतियों को लेकर लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। “ब्लॉक एवरीथिंग” नामक आंदोलन के तहत प्रदर्शनकारियों ने राजधानी पेरिस सहित कई शहरों में सड़कें जाम कर दीं। नांतेस, बोरदॉ, मार्सेल और टूलूज़ जैसे शहरों में आगजनी, पथराव और पुलिस से झड़प की घटनाएं हुईं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 80,000 पुलिसकर्मी तैनात किए, जिनमें से सिर्फ पेरिस में 6,000 मौजूद थे। अब तक लगभग 200 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। आंदोलनकारी राष्ट्रपति मैक्रों से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और सरकारी नीतियों को आम जनता विरोधी बता रहे हैं।
नेपाल की स्थिति
नेपाल की राजधानी काठमांडू और अन्य शहरों में हाल के दिनों में हुए विरोध-प्रदर्शन ने पूरे देश को हिला दिया है। सोशल मीडिया प्रतिबंध, भ्रष्टाचार और आर्थिक संकट को लेकर युवाओं ने आंदोलन शुरू किया था, जो धीरे-धीरे हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन और सरकारी दफ्तरों को निशाना बनाया, कई स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ हुई। पुलिस की गोलीबारी में 19 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। हालात काबू से बाहर होते देख सेना को तैनात करना पड़ा और कर्फ्यू लगा दिया गया। इस दबाव के बीच प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। आंदोलनकारी अब नई संवैधानिक व्यवस्था और राजनीतिक सुधार की मांग कर रहे हैं।
नेपाल और फ्रांस में उठी ये लहरें दिखाती हैं कि जनता अब आर्थिक दबाव, भ्रष्टाचार और सरकारी नीतियों को बिना आवाज उठाए स्वीकार करने को तैयार नहीं है। नेपाल में आंदोलन ने सरकार गिरा दी, वहीं फ्रांस में यह आंदोलन मैक्रों की सत्ता को बड़ी चुनौती दे रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों में राजनीतिक हालात और बिगड़ सकते हैं।













