नई दिल्ली,हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:।
डिजिटल ठगी के तेजी से बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने 72 वर्षीय वरिष्ठ महिला वकील के साथ हुई करोड़ों की ऑनलाइन ठगी के प्रकरण में आरोपी की जेल से रिहाई पर रोक लगा दी है। यह मामला डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest) के माध्यम से 3.29 करोड़ रुपये हड़पने का है, जिसमें आरोपी विजय खन्ना और अन्य सह-आरोपियों ने महिला अधिवक्ता को कथित रूप से धमकाकर और धोखे से धन हस्तांतरित कराया था। मई 2025 में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अब वे जमानत पर रिहा होने वाले थे, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि इस प्रकार की घटनाएं देश के नागरिकों की आर्थिक-डिजिटल सुरक्षा पर सीधा हमला हैं, और ऐसे मामलों में असाधारण आदेश देना जरूरी है। अदालत ने कहा कि यह सामान्य आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि एक गंभीर साइबर ठगी है, इसलिए संदिग्ध विजय खन्ना और उनके सह-आरोपियों को किसी भी अदालत द्वारा फिलहाल रिहा नहीं किया जाएगा।
पीठ ने टिप्पणी की, “हम किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जब राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल ठगी एक संगठित आपराधिक तंत्र बन चुकी है, तो अदालतों को असाधारण कदम उठाने होंगे। यह मामला ऐसे हस्तक्षेप की मांग करता है।”
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही देशभर की जांच एजेंसियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि डिजिटल गिरफ्तारी और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में सुरक्षा, जांच और अभियोजन को और मजबूत किया जा सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि ये दिशानिर्देश “एजेंसियों के लिए आंखें खोलने वाले साबित होंगे।”
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विपिन नायर ने इस प्रकरण का विवरण अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया और बताया कि पीड़िता अपने संपूर्ण जीवन की जमा-पूंजी गंवा बैठीं, जिससे अदालत ने मामले की गंभीरता को और अधिक महत्व दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने देशभर में बढ़ रहे डिजिटल फ्रॉड के मामलों के विरुद्ध कठोर संदेश दिया है। यह निर्णय साइबर अपराधों के खिलाफ न्यायपालिका की बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।













