प्रयागराज।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
संगम नगरी प्रयागराज में पौष पूर्णिमा के पावन स्नान पर्व के साथ शनिवार से माघ मेला 2026 का शुभारंभ हो रहा है। गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम तट पर एक माह तक चलने वाला यह मेला आस्था, संस्कृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम माना जाता है। पौष पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक चलने वाले इस आयोजन में देशभर से लाखों श्रद्धालु और साधक संगम तट पर साधना करेंगे।
चार लाख से अधिक कल्पवासी करेंगे तप-साधना
इस वर्ष माघ मेले में कल्पवासियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मेला प्रशासन के अनुसार, 4 लाख से अधिक कल्पवासी संगम तट पर कल्पवास करेंगे। पूरे एक माह तक गंगा तट की रेत पर तंबुओं में रहकर कल्पवासी जप, तप, संयम और साधना करेंगे। दंडी संन्यासी, रामानंदी संत, शंकराचार्य और विभिन्न अखाड़ों के संतों की उपस्थिति से मेला क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित रहेगा।
पहली बार बसाया गया ‘प्रयागवाल नगर’
कल्पवासियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए योगी सरकार ने इस बार विशेष पहल की है। पहली बार 950 बीघा क्षेत्र में ‘प्रयागवाल नगर’ बसाया गया है। यह नगर नागवासुकी मंदिर के सामने, गंगा नदी के पार विकसित किया गया है। तीर्थ पुरोहितों और मेला प्रशासन के आपसी समन्वय से यह निर्णय लिया गया, ताकि कल्पवासियों को बेहतर और सुव्यवस्थित सुविधा मिल सके।
गंगा तट के समीप तंबू, बुजुर्गों के लिए विशेष व्यवस्था
कल्पवासियों को गंगा तट के नजदीक ही ठहराया गया है, जिससे उन्हें प्रतिदिन स्नान में परेशानी न हो। बुजुर्ग, असहाय और बीमार कल्पवासियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग सेक्टरों में सुविधाजनक स्थान आवंटित किए गए हैं।
स्वच्छता, सुरक्षा और ठंड से बचाव पर फोकस
माघ मेला क्षेत्र को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग से बचने की अपील की जा रही है। ठंड से बचाव के लिए शिविरों के बाहर अलाव की व्यवस्था की गई है, जिससे शीतलहर में कल्पवासियों को राहत मिल सके।
माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व
- पौष पूर्णिमा: 3 जनवरी
- मकर संक्रांति: 14 जनवरी
- मौनी अमावस्या: 18 जनवरी
- बसंत पंचमी: 23 जनवरी
- माघी पूर्णिमा: 1 फरवरी
- महाशिवरात्रि: 15 फरवरी
















