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महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: कमल की सुनामी में ढह गया ठाकरे–कांग्रेस का किला ! BMC से लेकर 29 नगर निगमों तक BJP का कब्जा

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

ठाकरे भाइयों के हाथ से BMC फिसली, BJP का महाराष्ट्र में दबदबा
29 नगर निगम नतीजों में कांग्रेस-सैन्य गठबंधन को बड़ा झटका

महाराष्ट्र की राजनीति में नगर निगम चुनावों ने बड़ा सियासी संदेश दे दिया है। राज्य की 29 नगर निगमों के नतीजे सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जबरदस्त बढ़त बनाते हुए 21 नगर निगमों पर कब्जा जमा लिया है। इन नतीजों में सबसे बड़ा झटका शिवसेना (ठाकरे गुट) और कांग्रेस को लगा है, जिनका शहरी राजनीति में प्रभाव लगातार कमजोर होता नजर आया।

मुंबई में 25 साल बाद सत्ता से बाहर ठाकरे गुट

96 सीट पर जीत दर्ज,

अभी तक के आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी 96 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है जबकि शिंदे गुट की शिवसेना भी 30 सीटों पर डंका बजा चुकी है. इस तरह से देखें तो बीएमसी अब पूरी तरह से महायुति के कब्जे में है. बीजेपी के लिए यह इसलिए भी बड़ी जीत मानी जा रही है क्योंकि उसने विधानसभा चुनाव के बाद अब बीएमसी में ठाकरे बंधुओं का किला हिला दिया है.

चुनाव से पहले बीएमसी में काबिज ठाकरे गुट की ओर से कई बड़े आरोप भी लगाए गए थे, लेकिन अब सब फिसड्डी साबित हो रहे हैं. ठाकरे वर्चस्व को और मजबूत करने के लिए मनसे के मुखिया राज ठाकरे भी उद्धव ठाकरे के साथ आ गए थे, लेकिन राज ठाकरे की पार्टी मनसे का निराशाजनक प्रदर्शन देखने को मिला हैइन चुनावों का सबसे अहम परिणाम मुंबई महानगरपालिका (BMC) को लेकर रहा। करीब 25 वर्षों से BMC पर काबिज रही शिवसेना (ठाकरे गुट) को सत्ता से बाहर होना पड़ा। मुंबई में BJP की जीत को न सिर्फ नगर निगम स्तर पर, बल्कि राज्य की राजनीति में भी बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यह परिणाम बताता है कि शहरी मतदाताओं का रुझान तेजी से बदला है।

BJP की 21 नगर निगमों में बड़ी जीत

भाजपा ने मुंबई के अलावा पुणे, नागपुर, नासिक, ठाणे, औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से अहम शहरों में भी अपना वर्चस्व कायम रखा। इन नगर निगमों में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत या निर्णायक स्थिति हासिल कर प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। पार्टी के रणनीतिकार इसे संगठन की मजबूती और केंद्र–राज्य सरकार के कामकाज का असर बता रहे हैं।

कांग्रेस और शिवसेना की सिमटी ताकत

कभी शहरी क्षेत्रों में मजबूत मानी जाने वाली कांग्रेस इस बार 3 से 4 नगर निगमों तक ही सिमट गई। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई और कुछ ही निकायों में प्रभाव दिखा सकी। दोनों दलों के लिए यह नतीजे आत्ममंथन की स्थिति पैदा करते हैं।

मालेगांव में निर्दलीय बने किंगमेकर

मालेगांव नगर निगम में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। यहां निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका में उभरकर सामने आए हैं। आने वाले दिनों में यहां गठबंधन की राजनीति देखने को मिल सकती है।

राजनीतिक संकेत

इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में BJP फिलहाल सबसे मजबूत ताकत बनकर उभरी है। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिहाज से भी इन परिणामों को बेहद अहम माना जा रहा है।

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