हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट जल्द ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ पर अहम फैसला सुना सकता है। यह फैसला न सिर्फ अमेरिका बल्कि भारत समेत कई देशों के लिए भी दूरगामी असर वाला होगा। यदि अदालत ने टैरिफ को असंवैधानिक ठहराया, तो ट्रंप प्रशासन के सामने बड़ी राजनीतिक और आर्थिक चुनौती खड़ी हो जाएगी।
टैरिफ रद्द होने पर क्या करेगा ट्रंप प्रशासन?
राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी सहयोगी और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने संकेत दिया है कि प्रशासन किसी भी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में ग्रीर ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ को रद्द करता है, तो सरकार अगले ही दिन नए टैरिफ लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी। यानी अदालती फैसले के बावजूद वैकल्पिक कानूनी रास्तों से शुल्क दोबारा लगाए जा सकते हैं।
रिफंड और आर्थिक संकट की आशंका
ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर टैरिफ अवैध घोषित हुए, तो वसूली गई रकम लौटाना लगभग असंभव होगा। उनका कहना है कि यह रकम इतनी विशाल है कि यह तय करने में ही वर्षों लग जाएंगे कि किसे, कब और कितनी राशि लौटाई जाए। इससे अमेरिकी खजाने और बाजारों पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों अहम?
ये टैरिफ अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए थे, जिसके जरिए ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया। अदालत का फैसला राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमाएं तय करेगा। अगर फैसला ट्रंप के खिलाफ जाता है, तो पूरा ग्लोबल टैरिफ सिस्टम प्रभावित हो सकता है।
भारत और वैश्विक व्यापार पर असर
भारत पर पहले से ही 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए जा चुके हैं। ऐसे में फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और वैश्विक सप्लाई चेन में बड़े बदलाव संभव हैं।

















