नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का लगभग तीन घंटे का संक्षिप्त भारत दौरा रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम साबित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में व्यापार से लेकर रक्षा, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और ऊर्जा तक 5 बड़े समझौतों पर सहमति बनी। इतने कम समय में इतने व्यापक निर्णय दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों और गहरी आपसी समझ को दर्शाते हैं।

2032 तक 200 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य
बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि भारत और UAE ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ा बूस्टर साबित हो सकता है, खासकर निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप सेक्टर में।
रक्षा सहयोग में नई मजबूती
रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहा। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल सौदे, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा तकनीक में सहयोग शामिल है। जानकारों के मुताबिक, यह समझौता भारत की रक्षा निर्यात क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा भूमिका को मजबूती देगा।
सिविल न्यूक्लियर और हाई-टेक साझेदारी
बैठक में सिविल न्यूक्लियर सहयोग पर भी अहम चर्चा हुई। उन्नत न्यूक्लियर रिएक्टरों के विकास और तैनाती में साझेदारी पर सहमति बनी। इसके साथ ही UAE भारत में सुपर कंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने में मदद करेगा, जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिसर्च और डेटा प्रोसेसिंग क्षमताओं को नई रफ्तार मिलेगी।
ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर फोकस
ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से UAE हर साल भारत को 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG की आपूर्ति करेगा। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा समझौते के जरिए सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
कूटनीतिक सफलता का संदेश
विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन भारत का किसी क्षेत्रीय टकराव में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का इरादा नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा क्षमता और तकनीकी विकास के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता है, जिसने भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दी है।













