हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
सुबह की खुशी, शाम को मातम
“मां सुबह फोन पर बहुत खुश थीं। कह रही थीं—काम पर जा रही हूं, पैसे इकट्ठे हो गए हैं, 26 जनवरी को मेला लगेगा, जरूर आना…कपड़े खरीदवा दूंगी।” लेकिन अर्चना को क्या पता था कि यह मां से आखिरी बातचीत होगी। जबलपुर हिट एंड रन हादसे ने उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।
रोती बेटी, मां की तस्वीर से लिपटी उम्मीदें
जबलपुर हिट एंड रन में अपनी मां वर्षा कुशराम को खो चुकी अर्चना का रो-रोकर बुरा हाल है। मां की तस्वीर को सीने से लगाए वह बार-बार बस यही कह रही है—“भगवान मेरी मां को वापस लौटा दो। अभी तो मेला घूमना था, मां…।” मां का सपना था कि बेटी पढ़-लिखकर बड़ी अधिकारी बने।
एक्सीडेंट छिपाया, गांव बुलाया गया
अर्चना मंडला में हॉस्टल में रहकर आर्ट्स से ग्रेजुएशन कर रही थी। मां रोज मजदूरी कर उसकी पढ़ाई का खर्च उठाती थीं। हादसे की जानकारी नहीं दी गई, सिर्फ इतना कहा गया कि गांव आ जाओ। गांव पहुंचते ही अर्चना को सच का सामना करना पड़ा—मां अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
पढ़ाई के लिए 45 किलोमीटर का सफर
वर्षा कुशराम रोज मंडला से करीब 45 किलोमीटर दूर जबलपुर काम पर जाती थीं। बेटी उन्हें रोकती थी, लेकिन मां कहती थीं—“पढ़ाई जरूरी है, पैसे की कमी नहीं होनी चाहिए।” मेहनत, त्याग और उम्मीद—यही उनकी पहचान थी।
मेले की तैयारी, अधूरा वादा
26 जनवरी को रानी दुर्गावती समाधि स्थल पर लगने वाले मेले के लिए मां पैसे जोड़ रही थीं। बेटी से कहा था—“मेले में कपड़े खरीद दूंगी।” मगर नियति ने यह वादा अधूरा छोड़ दिया।
हादसा कैसे हुआ
रविवार को NH-30 पर जबलपुर में NHAI का काम कर रही आदिवासी महिलाएं डिवाइडर के पास खाना खा रही थीं। तभी तेज रफ्तार कार ने उन्हें कुचल दिया और चालक मौके से फरार हो गया। इस दर्दनाक हादसे में पांच महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक घायल हैं।













