Saraswati Puja 2026:
देशभर में आज बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन मां सरस्वती की आराधना करने से बुद्धि, स्मरण शक्ति और रचनात्मक क्षमता में वृद्धि होती है।
बसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है। इसे देवी सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन देवी सरस्वती ने पृथ्वी पर प्रकट होकर मानव को विद्या, भाषा, संगीत और साहित्य का ज्ञान प्रदान किया था। महर्षि कालिदास जैसे महान कवियों और विद्वानों ने भी इसी देवी की आराधना कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा को निखारा।
पंचमी तिथि और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को रात 02:28 बजे से प्रारंभ होकर 24 जनवरी 2026 को रात्रि 01:46 बजे तक रहेगी।
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त:
सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस समय में पूजा करना विद्या, लेखन, संगीत और कला के क्षेत्र में विशेष लाभ प्रदान करता है।
मां सरस्वती की पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें।
- पीले रंग के वस्त्र पहनें, जो बसंत ऋतु और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
- पूजा स्थान पर मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
- पीले फूल, अक्षत, हल्दी, रोली और केसर भात या बूंदी के लड्डू अर्पित करें।
- पुस्तकों, कॉपियों और संगीत वाद्ययंत्रों को पूजा में शामिल करें।
सरस्वती मंत्र का महत्व
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए निम्न मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है—
“या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से वाणी में मधुरता, एकाग्रता और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक और कलाकारों के लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ माना गया है।













