नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में लगातार सामने आ रही छात्र आत्महत्या की घटनाओं ने सरकार को गंभीर चिंता में डाल दिया है। हाल ही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) कानपुर में एक छात्र द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
IIT कानपुर की घटना बनी वजह
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार IIT कानपुर में हुई हालिया दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की भावनात्मक और मानसिक भलाई के लिए बने तंत्र पर्याप्त और प्रभावी हैं। मंत्रालय का मानना है कि इन घटनाओं की गहन समीक्षा और ठोस समाधान अब बेहद जरूरी हो गया है।
जुलाई 2023 में जारी हुए थे दिशानिर्देश
गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2023 में देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए ‘छात्रों की भावनात्मक और मानसिक भलाई के लिए फ्रेमवर्क दिशानिर्देश’ जारी किए थे। इनका उद्देश्य संस्थानों में एक सक्षम, समावेशी और सहायक माहौल तैयार करना था, ताकि छात्र मानसिक दबाव, तनाव और अवसाद से उबर सकें।
क्या थी सरकार की पहल?
सरकार द्वारा तैयार इस फ्रेमवर्क में कई अहम बिंदुओं को शामिल किया गया है। इनमें संकाय सदस्यों के लिए संवेदनशीलता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम, छात्रों के लिए ओरिएंटेशन और परामर्श व्यवस्था, तनाव और संकट की शुरुआती पहचान के लिए तंत्र, मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs), आत्महत्या रोकथाम रणनीतियां तथा बॉडी-मेंटर सिस्टम के जरिए छात्रों को निरंतर सहयोग देना शामिल है।
जांच समिति के सदस्य
फ्रेमवर्क दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन की समीक्षा और IIT कानपुर में छात्र आत्महत्या की घटनाओं की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति में शामिल हैं—
- प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे, अध्यक्ष, नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम (NETF)
- डॉ. जितेंद्र नागपाल, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, मूलचंद अस्पताल
- जॉइंट सेक्रेटरी (हायर एजुकेशन), शिक्षा मंत्रालय
15 दिन में आएगी रिपोर्ट
शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि समिति अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र खुद को सुरक्षित, समर्थित और मानसिक रूप से मजबूत महसूस करें।













