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IIT-IIM और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बढ़ी SC-ST छात्रों की भागीदारी, सरकार ने लोकसभा में पेश किया डेटा

नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
लोकसभा के बजट सत्र के दौरान शिक्षा मंत्रालय ने केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के दाखिले से जुड़े अहम आंकड़े साझा किए हैं। सरकार के मुताबिक वर्ष 2014 के बाद से IIT, IIM, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और IISc जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में SC-ST छात्रों की भागीदारी में लगातार और उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने एक लिखित उत्तर में दी।

AISHE डेटा से सामने आई तस्वीर

मंत्री ने बताया कि दाखिले से संबंधित सभी आंकड़े ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) के माध्यम से एकत्र किए जाते हैं। AISHE के अनुसार 2014-15 से 2022-23 (प्रोविजनल) के बीच SC-ST छात्रों की संख्या में साफ बढ़ोतरी हुई है, जो उच्च शिक्षा तक पहुंच को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बढ़ा एनरोलमेंट

अगर केंद्रीय विश्वविद्यालयों की बात करें तो SC छात्रों का एनरोलमेंट 2014-15 में 71,621 था, जो 2022-23 तक बढ़कर 89,182 हो गया। वहीं ST छात्रों की संख्या भी इसी अवधि में 25,964 से बढ़कर 32,801 दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी में निरंतर इजाफा हो रहा है।

IIT और IIM में भी दिखा बदलाव

देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों IIT में SC छात्रों की संख्या 10,392 से बढ़कर 18,076 हो गई, जबकि ST छात्रों का एनरोलमेंट 4,546 से बढ़कर 7,408 तक पहुंच गया। इसी तरह IIM जैसे प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में SC छात्रों की संख्या 983 से बढ़कर 2,537 और ST छात्रों की संख्या 410 से बढ़कर 942 हो गई है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी सरकार का फोकस

लोकसभा में छात्रों की आत्महत्या से जुड़े सवालों पर मंत्री ने बताया कि इसका डेटा NCRB द्वारा जारी रिपोर्ट Accidental Deaths and Suicides in India में उपलब्ध कराया जाता है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सरकार मल्टी-प्रॉन्ग्ड अप्रोच अपना रही है। मनोदर्पण कार्यक्रम के तहत टोल-फ्री हेल्पलाइन, काउंसलिंग और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

बजट 2026 में नई पहल

यूनियन बजट 2026 में नॉर्थ इंडिया में निमहांस-2 स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही रांची और तेजपुर स्थित नेशनल मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट्स को रीजनल एपेक्स संस्थानों के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन कदमों से उच्च शिक्षा के साथ-साथ छात्रों की भलाई को भी मजबूती मिलेगी।

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