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“क्या सनातनी होना पाप है?” – भावुक हुए कश्मीरी पंडित रमेश मोटा

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 24 अप्रैल: 2025,

पहलागाम आतंकी हमला: 26 निर्दोषों की मौत पर देश में आक्रोश, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
आम नागरिकों और कश्मीर समिति के सदस्यों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की

नई दिल्ली – कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे देशभर में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई। इस भयावह घटना के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कश्मीर समिति (दिल्ली) और आम नागरिकों ने एकजुट होकर भावुक और उग्र प्रदर्शन किया।

काली पट्टियों और नारों से भरा विरोध प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने सिर और बाजू पर काली पट्टियां बांधकर शोक और विरोध प्रकट किया। हाथों में तख्तियां लिए लोगों ने सरकार से आतंकियों और उनके स्थानीय समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान लोगों ने “आतंक के खिलाफ निर्णायक कदम उठाओ”, “दोषियों को कड़ी सजा दो” जैसे नारे भी लगाए।

“स्थानीय समर्थन के बिना मुमकिन नहीं था हमला”
प्रदर्शन में शामिल कश्मीर समिति के सदस्यों ने सवाल उठाया कि आतंकियों ने सात दिनों तक इलाके की रेकी की, इस दौरान उन्हें रसद और ठहरने की सुविधा कहां से मिली? क्या बिना स्थानीय लोगों के सहयोग के यह संभव हो सकता है? उनका मानना है कि हमले के पीछे न सिर्फ पाकिस्तान का हाथ है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी समर्थन मिला है।

भावनात्मक बयान: “सनातनी होना क्या पाप है?”
प्रदर्शन में शामिल कश्मीरी पंडित रमेश कुमार मोटा, जो पहले भी आतंक का शिकार हो चुके हैं, ने भावुक होकर कहा, “मैं बच्चा था जब मेरे पिता को कश्मीर में कट्टरपंथियों ने मार डाला था। आज जो हुआ, उसने पुराने जख्म ताजा कर दिए। क्या हमारा सनातनी हिंदू होना पाप है?” उन्होंने यह भी मांग की कि आतंकियों के साथ-साथ स्थानीय मददगारों को भी कड़ी सजा दी जाए।

इंटेलिजेंस की विफलता पर उठे सवाल
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर आम नागरिक कश्मीर जाते हैं, तो पांच बार चेकिंग होती है। फिर ये आतंकी हथियारों के साथ पहलगाम तक कैसे पहुंचे? ये सीधा-सीधा इंटेलिजेंस की विफलता है।” उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की।

“अब सहनशीलता नहीं, कार्रवाई चाहिए”
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की कि अब वक्त आ गया है जब सिर्फ सहनशीलता से काम नहीं चलेगा, बल्कि निर्णायक कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने मांग की कि दोषियों को जल्द-से-जल्द पकड़ा जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई ऐसी घटना न दोहरा सके।

न्याय की उम्मीद मोदी सरकार से
कई प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि उन्हें अब मोदी सरकार से न्याय की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अन्याय को अब तक भुलाया नहीं गया है, और यह हमला उस दर्द को और गहरा कर गया है।

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