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आरोपियों को जमानत, “कोई वकील केस लेने को तैयार नहीं” का दावा
Supreme Court of India ने उत्तर प्रदेश के चर्चित बाराबंकी टोल प्लाजा मामले में अहम हस्तक्षेप करते हुए केस को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई अब Tis Hazari Courts, Delhi में कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आरोपियों को राहत देते हुए जमानत भी प्रदान की गई है।
क्या है पूरा मामला

यह घटना 14 जनवरी 2026 की है, जब Barabanki के एक टोल प्लाजा पर वकील रत्नेश शुक्ला के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया था। आरोप है कि टोल कर्मचारियों ने विवाद के दौरान उनके साथ अभद्रता और हिंसा की। इस घटना के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आया और कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
ट्रांसफर की मांग क्यों उठी
आरोपियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया कि स्थानीय स्तर पर उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल रही है। उनका दावा था कि बाराबंकी में कोई भी वकील उनका पक्ष लेने को तैयार नहीं है, जिससे उनके बचाव का अधिकार प्रभावित हो रहा है। इस दलील को गंभीरता से लेते हुए शीर्ष अदालत ने मामले को दिल्ली ट्रांसफर करने का फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि न्याय प्रणाली में निष्पक्षता और सभी पक्षों को समान अवसर मिलना बेहद जरूरी है। यदि किसी आरोपी को उचित कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है, तो यह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसी आधार पर केस को दूसरे राज्य में स्थानांतरित करना उचित समझा गया।
मामले का असर
इस फैसले को न्यायिक निष्पक्षता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां स्थानीय दबाव या परिस्थितियों के कारण निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल उठते हैं।
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