हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं, लेकिन नियम आसान, टैक्स बोझ हल्का करने की कोशिश
केंद्रीय बजट 2026 में भले ही इनकम टैक्स स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन में कोई बदलाव नहीं किया गया हो, लेकिन सैलरीड क्लास, मिडिल क्लास और छोटे टैक्सपेयर्स के लिए कई अहम राहत भरी घोषणाएं की गई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और कम विवाद वाला बनाने पर खास जोर दिया है। नए इनकम टैक्स एक्ट से लेकर टीडीएस-टीसीएस में कटौती और जुर्माने-प्रोसिक्यूशन को तर्कसंगत बनाने तक, बजट में ऐसे 14 बड़े ऐलान हैं जो आम लोगों की जेब और टैक्स कंप्लायंस दोनों को प्रभावित करेंगे।
नया इनकम टैक्स एक्ट और आसान नियम
बजट भाषण के मुताबिक, नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसके तहत नियमों और फॉर्म्स को सरल बनाया जाएगा ताकि आम नागरिक आसानी से टैक्स नियमों का पालन कर सकें। यह लंबे समय से चली आ रही जटिलताओं को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
छोटे टैक्सपेयर्स को सीधी राहत
छोटे टैक्सपेयर्स के लिए निल या कम डिडक्शन सर्टिफिकेट की ऑटोमैटिक व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। अब इसके लिए निर्धारण अधिकारी के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, मोटर एक्सीडेंट क्लेम पर मिलने वाले ब्याज को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है और उस पर कोई टीडीएस नहीं लगेगा।
टीडीएस-टीसीएस में कटौती
फॉरेन ट्रैवल पैकेज पर टीसीएस को घटाकर 2 फीसदी कर दिया गया है। इसी तरह शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए एलआरएस योजना के तहत टीडीएस भी 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी किया गया है। इससे विदेश जाने वाले छात्रों और परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा।
आईटीआर और टैक्स कंप्लायंस में सहूलियत
रिवाइज्ड आईटीआर दाखिल करने की डेडलाइन अब 31 दिसंबर की जगह 31 मार्च तक होगी, हालांकि इसके लिए मामूली शुल्क देना होगा। वहीं, सामान्य आईटीआर की अंतिम तिथि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा, फॉर्म 15G और 15H को लेकर भी प्रक्रिया आसान की गई है।
एनआरआई और विदेशी संपत्ति से जुड़े प्रावधान
एनआरआई द्वारा भारत में प्रॉपर्टी बेचने पर टीडीएस प्रक्रिया को सरल किया गया है। साथ ही, विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण के लिए एक बार की 6 महीने की विशेष योजना लाई गई है, जिससे छोटे टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी और प्रोसिक्यूशन से बचाव होगा।
जुर्माने और प्रोसिक्यूशन में नरमी
बजट 2026 में जुर्माने और प्रोसिक्यूशन को तर्कसंगत बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। तकनीकी चूकों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है और छोटे मामलों में केवल जुर्माने का प्रावधान होगा।
शेयर बाजार और इंपोर्ट पर असर
शेयर बायबैक को अब कैपिटल गेन माना जाएगा, जबकि पर्सनल यूज के लिए इंपोर्टिड सामान पर कस्टम ड्यूटी आधी कर दी गई है। वहीं, एफएंडओ ट्रेडिंग पर एसटीटी और सीमा शुल्क में बढ़ोतरी की गई है।
एक्सपर्ट की राय
अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के CFO संतोष अग्रवाल के अनुसार, यूनियन बजट 2026 ‘नए शहरी भारत’ का मजबूत ब्लूप्रिंट है। पब्लिक कैपिटल खर्च बढ़ने से टियर-2 और टियर-3 शहरों में विकास को गति मिलेगी और रियल एस्टेट सेक्टर को भी नया आयाम मिलेगा।













