हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: शनिवार 21 जून 2025
एटा। जनपद एटा के रिजोर गांव स्थित एक प्राचीन टीले की खुदाई के दौरान शुक्रवार को एक प्राचीन मूर्ति मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। खुदाई आरआर सेंटर के निर्माण के लिए की जा रही थी, उसी दौरान यह प्रतिमा सुरक्षित अवस्था में भूमि से बाहर आई। प्रतिमा को लेकर दो समुदायों – जैन और बौद्ध – में दावा हो रहा है कि यह उनके आराध्य की है। फिलहाल पुरातत्व विभाग की टीम जांच के लिए स्थल पर भेजी जा रही है, जो यह तय करेगी कि मूर्ति भगवान महावीर स्वामी की है या भगवान बुद्ध की।
इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई प्रतिमा की तस्वीरें, दो समुदायों में दावा
खुदाई के तुरंत बाद ही प्रतिमा की तस्वीरें इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। तस्वीरें देखकर जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में रिजोर पहुंचने लगे और प्रतिमा को भगवान महावीर स्वामी की बता दिया। वहीं, बुद्ध अनुयायियों ने पहले ही स्थल पर पहुंचकर इसे भगवान बुद्ध की मूर्ति बताया था। दोनों समुदायों के लोगों ने अपने-अपने दावे को लेकर जोरशोर से अपनी बात रखी।
मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित, फिलहाल ग्राम प्रधान की निगरानी में
स्थिति को देखते हुए रिजोर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और विवाद की आशंका को भांपते हुए मूर्ति को गांव के प्रधान भूदेव सिंह के सुपुर्द कर दिया। मूर्ति को एक सुरक्षित कमरे में बंद कर दिया गया है, जहां ताला लगाया गया है और चाबी पुलिस अपने पास रखे हुए है।
स्थानीय प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रिया
गांव के पूर्व प्रधान जोगराज सिंह ने कहा कि प्रतिमा देखने से महावीर स्वामी की प्रतीत होती है, हालांकि अंतिम निर्णय पुरातत्व विभाग द्वारा ही किया जाएगा। भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप जैन ने भी यही दावा किया कि प्रतिमा जैन धर्म से जुड़ी प्रतीत होती है।
टीले का है ऐतिहासिक महत्व
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह टीला ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। पूर्व प्रधान ने जानकारी दी कि यह स्थल कभी राजा सांवल सिंह और खुशाल सिंह के शासनकाल का हिस्सा था, जहां एक किला भी स्थित था। कालांतर में वह किला ध्वस्त हो गया और अब यह क्षेत्र एक बड़ा टीला बन चुका है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि यहां व्यापक स्तर पर उत्खनन कराया जाए तो कई ऐतिहासिक धरोहरें सामने आ सकती हैं।
क्या कहता है जैन समुदाय का इतिहास
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि टीले से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित फफोतू गांव को जैन धर्म के अनुयायी तीर्थ स्थल मानते हैं। ऐसे में जैन समाज का दावा और भी मजबूत प्रतीत होता है।