हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
बटुकों के सम्मान पर जताई खुशी, कार्रवाई पर उठाए सवाल
बृजेश पाठक द्वारा बटुक ब्राह्मणों के सम्मान और ‘शिखा खींचना महापाप’ बताने वाले बयान का ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के दोनों डिप्टी सीएम वास्तविक शक्ति में नहीं हैं, क्योंकि गृह विभाग और पुलिस सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन है। उनके अनुसार, जब अधिकार सीमित हैं तो सख्त कार्रवाई संभव नहीं, ऐसे में बयानबाजी से केवल भावनात्मक संतोष मिलता है।
माघ मेले की घटना से बढ़ा विवाद
18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य संगम स्नान के लिए जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके विरोध में उन्होंने स्नान नहीं किया। यह भी आरोप सामने आया कि साथ आए बटुक ब्राह्मणों के साथ दुर्व्यवहार हुआ और उनकी चोटी खींची गई। इस घटना के बाद डिप्टी सीएम पाठक की टिप्पणी से सियासत और गरमा गई।
10 मार्च तक गऊ को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग
विद्या मठ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए शंकराचार्य ने योगी सरकार को 10 मार्च तक गऊ को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने और गऊ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी न होने पर 11 मार्च को लखनऊ में हिंदू समाज से अपील की जाएगी कि मुख्यमंत्री को समाज से बाहर करने का समर्थन करें।
गऊ रक्षा पर पश्चिम बंगाल का उदाहरण
शंकराचार्य ने 2019 से 2024 की पशु गणना रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में गायों की संख्या 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ी, जबकि यूपी में चार प्रतिशत से अधिक कमी आई। उनका दावा है कि इस आधार पर गऊ रक्षा के मामले में पश्चिम बंगाल का प्रदर्शन बेहतर रहा।
संघ प्रमुख के बयान पर प्रतिक्रिया
संघ प्रमुख के हिंदुओं को तीन बच्चे होने संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि पहले स्वयंसेवकों को विवाह के लिए प्रेरित किया जाए। बच्चों की संख्या का निर्णय गृहस्थ परिवारों पर छोड़ना चाहिए।
#BrijeshPathak #YogiAdityanath #Avimukteshwaranand #CowProtection #UttarPradeshPolitics














