हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
मौत के बाद की ‘हकीकत’: डॉ. राजीव पारती का दावा
भारत मूल के अमेरिकी एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव पारती ने मौत के बेहद नजदीक पहुंचकर ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। उनका कहना है कि उन्होंने नर्क, भगवान और आत्मा के वास्तविक अस्तित्व को महसूस किया।
नर्क का भयावह अनुभव
साल 2008 में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के दौरान 51 वर्षीय डॉ. राजीव की धड़कनें कुछ देर के लिए थम गईं। इस दौरान उन्होंने भयावह चीखें सुनीं और जले हुए मांस की बदबू महसूस की। उन्हें ऐसा लगा मानो किसी धधकती घाटी के किनारे खींचा जा रहा हो। उस वक्त उन्हें एहसास हुआ कि वे नर्क के मुहाने पर पहुंच चुके हैं।
जिंदगी में बड़ा बदलाव
इस अनुभव ने डॉ. राजीव की सोच ही बदल दी। उन्होंने बताया कि एक रहस्यमयी आवाज ने उनकी भौतिकवादी जिंदगी की निंदा की। इसके बाद उन्होंने बेकर्सफील्ड हार्ट हॉस्पिटल के मुख्य एनेस्थेसियोलॉजिस्ट का पद, लग्जरी गाड़ियां और आलीशान मकान छोड़ दिए। उन्होंने अपने अनुभव को दुनिया के सामने रखने का निर्णय लिया और सादगीपूर्ण जीवन अपनाया।
पुस्तक में दर्ज अनुभव
डॉ. राजीव ने अपनी आत्मकथा “Dying to Wake Up: A Doctor’s Voyage into the Afterlife and the Wisdom He Brought Back” में विस्तार से लिखा है। इसमें उन्होंने बताया कि यह अनुभव उन्हें आत्मा के उद्देश्य और जीवन के वास्तविक मकसद से जोड़ता है। हालांकि, उनके दोस्तों और सहयोगियों ने उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विशेषज्ञों के अनुसार, नियर-डेथ एक्सपीरियंस (NDE) वे क्षण होते हैं जब व्यक्ति मौत के करीब होता है, जैसे दिल का रुक जाना। इसमें लोग शरीर से अलग होने, शांति या रोशनी देखने का अनुभव बताते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक इसे जीवन के बाद का प्रमाण नहीं मानते और इसे मस्तिष्क की जैविक प्रतिक्रियाओं से जोड़ते हैं।













