लखनऊ। हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
केंद्रीय बजट को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि संसद में पेश किया गया बजट योजनाओं, परियोजनाओं, वादों और आश्वासनों से भरा हुआ है, लेकिन इनके भविष्य में ठोस और सकारात्मक परिणाम नजर नहीं आते। मायावती ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि योजनाओं के नाम भले ही बड़े-बड़े हों, लेकिन अगर जमीनी स्तर पर उनका असर सीमित रहा तो इससे जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।
बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति व नीयत का प्रतिबिंब
मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार सर्वसमाज के हित की बातें तो करती है, लेकिन उन्हें ईमानदारी से लागू नहीं करती। उनके अनुसार, बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति और नीयत का आईना होता है, जिसमें सरकार की चाल, चरित्र और चेहरा साफ दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा बजट में गरीबों और बहुजनों के हितों की बजाय पूंजीवादी सोच को प्राथमिकता दी गई है, जिससे बड़े उद्योगपति और धनाढ्य वर्ग अधिक लाभान्वित होते हैं।
बाबा साहेब के संविधान के अनुरूप काम पर सवाल
बसपा सुप्रीमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता की बात करती है, तो यह देखना जरूरी है कि सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व दिया गया है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के कल्याणकारी संविधान की पवित्र मंशा के अनुरूप सरकार ने वास्तव में कौन-से ठोस कदम उठाए हैं।
‘आया और गया’ वाला बजट न बने
मायावती ने यह आशंका भी जताई कि कहीं यह बजट भी पहले की तरह “आया और गया” बनकर न रह जाए। उन्होंने सवाल किया कि बजट 2025 में किए गए वादे और दावे क्या आज पूरे हुए हैं या वे सिर्फ औपचारिक रस्म बनकर रह गए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इन बजटों से आम जनता के जीवन में कोई ठोस और तुलनात्मक बदलाव देखने को मिला है या नहीं।
जनता के हित में जवाबदेही जरूरी
अंत में मायावती ने कहा कि बजट का वास्तविक मूल्यांकन तभी होगा, जब उसके प्रभाव आम आदमी, गरीब और बहुजन समाज के जीवन में दिखाई देंगे। केवल घोषणाओं और बड़े दावों से देश की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।













