हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय वार्ता हुई। यह पहली बार है जब काशी में किसी विदेशी राष्ट्र प्रमुख के साथ औपचारिक वार्ता आयोजित हुई। दोनों नेताओं ने रिश्तों को ‘इनहैंस्ड स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया और साझा प्राथमिकताओं पर सहमति जताई।
हिंद महासागर में साझा प्राथमिकता
पीएम मोदी ने कहा कि सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर भारत और मॉरीशस की साझा प्राथमिकता है। उन्होंने मॉरीशस को भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘विजन महासागर’ नीति का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। मोदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति का प्रवाह सदियों से मॉरीशस को समृद्ध करता रहा है।
आर्थिक पैकेज और सहयोग
भारत ने मॉरीशस के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की। इसमें ऊर्जा, विज्ञान-तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष शोध के क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। भारत चालू वित्त वर्ष में मॉरीशस को 25 मिलियन डॉलर की सहायता देगा। इसके अलावा 17.5 मेगावॉट के फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट सहित कई परियोजनाएं अनुदान आधारित होंगी। साथ ही IIT मद्रास और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांटेशन मैनेजमेंट ने मॉरीशस यूनिवर्सिटी के साथ समझौते किए।
स्थानीय मुद्रा में व्यापार
मोदी ने कहा कि यूपीआई और रुपे कार्ड की सफलता के बाद अब भारत-मॉरीशस स्थानीय मुद्रा में व्यापार शुरू करेंगे। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मॉरीशस पीएम का संबोधन
डॉ. रामगुलाम ने कहा कि भारत हमेशा मॉरीशस के विकास में साथ खड़ा रहा है। उन्होंने वाराणसी में मिले स्वागत पर आभार जताते हुए कहा कि ऐसा सम्मान किसी अन्य प्रधानमंत्री को नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अब समझ सकते हैं कि पीएम मोदी इतनी बड़ी जीत क्यों दर्ज करते हैं।
अयोध्या दौरा
मॉरीशस के प्रधानमंत्री शुक्रवार को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करेंगे। उनके स्वागत के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहेंगे। डीएम निखिल टीकाराम के अनुसार, पीएम रामगुलाम के साथ उनके मंत्रिमंडल के 30 सदस्य भी अयोध्या जाएंगे।
निष्कर्ष: काशी की ऐतिहासिक धरती पर भारत और मॉरीशस ने न सिर्फ कूटनीतिक संबंध मजबूत किए, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी की नई ऊंचाई पर पहुंचाया।













