बीजिंग/तियानजिन। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के इतर तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने भारत-चीन रिश्तों को नई दिशा दी है। लगभग 10 महीनों के बाद हुई इस मुलाकात में शी जिनपिंग ने स्वीकार किया कि भारत और चीन का मित्र बनना ही सही विकल्प है और दोनों देशों को सीमा विवाद को रिश्तों पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी बताते हुए कहा कि ‘‘भारत हाथी है और चीन ड्रैगन, दोनों को मिलकर एक-दूसरे की सफलता का जश्न मनाना चाहिए।’’ उन्होंने ‘‘ड्रैगन और हाथी के सहयोगात्मक नृत्य’’ को सही विकल्प करार दिया।
राष्ट्रपति शी ने इस वर्ष भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए कहा कि रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। उन्होंने आपसी विश्वास गहराने, आदान-प्रदान बढ़ाने, एक-दूसरे की चिंताओं का सम्मान करने और बहुपक्षीय सहयोग के जरिए साझा हितों की रक्षा करने का आह्वान किया।
शी ने परोक्ष रूप से अमेरिका की व्यापार और शुल्क नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि भारत और चीन को बहुपक्षवाद की रक्षा करनी होगी, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आगे बढ़ाना होगा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया अभूतपूर्व बदलावों से गुजर रही है और ऐसे समय में भारत और चीन जैसी प्राचीन सभ्यताएं तथा सबसे अधिक आबादी वाले देश वैश्विक स्थिरता और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन ग्लोबल साउथ के पुराने सदस्य होने के नाते दक्षिणी गोलार्ध के देशों की आवाज़ को मजबूती से उठाएं। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, अमेरिका की एकतरफा नीतियों और भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया तनाव की पृष्ठभूमि में यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।