हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
साल के अंत तक उत्पादन शुरू करने का ऐलान
भारत ने रेयर अर्थ मेटल के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय खनन मंत्री G. Kishan Reddy ने घोषणा की है कि देश इस वर्ष के अंत तक रेयर अर्थ पर्मानेंट मैग्नेट का घरेलू उत्पादन शुरू कर देगा। यह उत्पादन निजी कंपनियों की साझेदारी से किया जाएगा, ताकि तकनीक, निवेश और विशेषज्ञता का बेहतर समन्वय हो सके। अभी तक भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता रहा है।
73 अरब रुपये का विशेष कार्यक्रम
सरकार ने करीब 73 अरब रुपये के विशेष कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य देश में ही स्थायी चुंबकों का निर्माण बढ़ाना है। ये चुंबक इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), एयरोस्पेस, रक्षा उपकरणों और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। आने वाले वर्षों में खासतौर पर EV सेक्टर के विस्तार के साथ इनकी मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है।
तकनीक तैयार, नए संयंत्रों की योजना
खनन मंत्रालय और एक सरकारी संस्था ने इन मैग्नेट के निर्माण की तकनीक विकसित कर ली है। साथ ही चार राज्यों में महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग के लिए नए संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
भारत के पास तीसरा सबसे बड़ा भंडार
United States Geological Survey के अनुसार भारत के पास 6.9 मिलियन टन का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार है। इसके बावजूद निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी के कारण इन संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाया। वर्तमान में चीन वैश्विक स्तर पर लगभग 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग नियंत्रित करता है। हालिया आपूर्ति बाधाओं के बाद भारत का यह कदम रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2030 तक देश में रेयर अर्थ पर्मानेंट मैग्नेट की खपत दोगुनी होने का अनुमान है, ऐसे में घरेलू उत्पादन आयात निर्भरता कम करने में अहम साबित होगा।
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