हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
नई दिल्ली: अमित शाह ने लोकसभा में ‘नक्सल मुक्त भारत’ पर चर्चा का जवाब देते हुए नक्सलियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि जो हथियार नहीं डालेंगे, उन्हें “गोली का जवाब गोली से” मिलेगा। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा और नक्सलवाद के लिए पूर्व सरकारों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
नक्सलवाद के खिलाफ सरकार का सख्त रुख
गृह मंत्री ने कहा कि देश लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा, जहां 12 राज्यों में इसका असर था। उन्होंने बताया कि सरकार के लगातार प्रयासों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से अब स्थिति काफी सुधरी है। खासकर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है। वहां अब गांव-गांव में स्कूल और विकास कार्य हो रहे हैं।
आदिवासियों के नाम पर राजनीति का आरोप
अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने आदिवासियों के विकास पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि दशकों तक शासन करने के बावजूद आदिवासियों को बुनियादी सुविधाएं—घर, पानी, शिक्षा और बैंकिंग सेवाएं—नहीं मिल पाईं। उन्होंने विपक्ष से आत्ममंथन करने को कहा।
‘नक्सल विचारधारा में सत्ता बंदूक से निकलती है’
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल विचारधारा विकास विरोधी है और इसमें सत्ता बंदूक के जरिए हासिल करने की सोच है। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सली आदिवासियों को बहकाकर उन्हें हिंसा के रास्ते पर ले जाते हैं और अपने ही लोगों का खून बहाते हैं।
रेड कॉरिडोर में विकास बाधित
शाह ने कहा कि नक्सलवाद के कारण ‘रेड कॉरिडोर’ में गरीबी बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि नक्सलियों ने शिक्षा के प्रसार को रोकने के लिए स्कूल तक जला दिए, जिससे आदिवासी समाज पिछड़ता चला गया।
मोदी सरकार में बदली तस्वीर
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि जनता के सहयोग से ही नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता मिली है और देश अब नक्सल मुक्त भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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