हिन्दुस्तान मिरर न्यूज,28 जून 2025
नगर क्षेत्रों में शामिल गांवों से वार्डों में होगा आंशिक परिवर्तन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियां अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हैं। शनिवार, 28 जून से प्रदेश में ग्राम पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आरंभ हो रही है। इस क्रम में 28 से 30 जून के बीच ग्राम पंचायतवार जनसंख्या का निर्धारण किया जाएगा, जिससे आगामी पंचायत चुनावों की बुनियादी संरचना तय होगी।
शासन ने परिसीमन की विस्तृत समयसारिणी जारी कर दी है। प्रस्तावित वार्डों की सूची 1 से 3 जुलाई तक प्रकाशित होगी, जिस पर आमजन से आपत्तियां 4 से 8 जुलाई के बीच ली जाएंगी। प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण 9 से 11 जुलाई तक किया जाएगा, जबकि अंतिम सूची 12 से 14 जुलाई के बीच जारी की जाएगी। सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि यह अंतिम सूची 16 जुलाई तक पंचायतीराज निदेशालय को उपलब्ध करा दी जाए।
परिसीमन प्रक्रिया का यह चरण उन ग्राम पंचायतों पर विशेष रूप से केंद्रित है, जो हाल ही में नगर पंचायतों, नगर पालिकाओं और नगर निगमों के सृजन अथवा सीमा विस्तार से प्रभावित हुई हैं। इन परिवर्तनों के कारण कई ग्राम पंचायतों की जनसंख्या 1000 से कम रह गई है, जिससे उनके पुनर्गठन की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।
उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के अनुसार, राज्य सरकार 1000 की न्यूनतम जनसंख्या वाले राजस्व ग्राम या ग्राम समूह को ही पंचायत क्षेत्र घोषित कर सकती है। जिन ग्राम पंचायतों के कुछ हिस्से नगरीय निकायों में शामिल हो चुके हैं और बची हुई जनसंख्या मानक के अनुरूप नहीं है, उन्हें निकटवर्ती पंचायतों में समाहित किया जाएगा।
वहीं, यदि किसी ग्राम पंचायत का शेष राजस्व ग्राम 1000 की जनसंख्या की पात्रता रखता है, तो उसे स्वतंत्र ग्राम पंचायत का दर्जा भी दिया जा सकता है। इस प्रकार की आंशिक परिसीमन प्रक्रिया से न सिर्फ पंचायत संरचना अधिक सुसंगत होगी, बल्कि शहरी और ग्रामीण शासन व्यवस्थाओं में स्पष्टता भी आएगी।
इस पूरी कवायद का मकसद 2026 में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की प्रक्रिया को समय पर और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराना है। शासन ने सभी जिलों को समयसारिणी का कठोरता से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।