हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
पांच साल में दोगुनी हुई दर
चीन में दवा अनुसंधान की रफ्तार तेज होने के साथ लैब में उपयोग होने वाले बंदरों की कीमतों में भारी उछाल आया है। एक लैब बंदर की कीमत अब लगभग 1,40,000 युआन (करीब 18.37 लाख रुपये) तक पहुंच गई है। यह रकम चीन की औसत सालाना आय से भी अधिक है। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार 2024 में बड़ी इंडस्ट्रीज में कर्मचारियों की औसत सालाना आय 1,02,452 युआन थी। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2021 में एक बंदर की कीमत लगभग 70,500 युआन थी, जो अब दोगुनी से अधिक हो चुकी है।
सोने से भी तेज रफ्तार
कीमतों में बढ़ोतरी की तुलना सोने से करें तो बंदरों की दर ज्यादा तेजी से बढ़ी है। 2019-20 में चीन में सोने का भाव 600-630 युआन प्रति ग्राम था, जो 2025 में बढ़कर लगभग 1,160 युआन प्रति ग्राम हो गया। यानी सोने की कीमत भी लगभग दोगुनी हुई, लेकिन लैब बंदरों की कीमत में उछाल कहीं अधिक तेज और प्रभावशाली रहा है।
प्रीक्लिनिकल ट्रायल में अहम भूमिका
इन बंदरों का उपयोग दवाओं के प्रीक्लिनिकल ट्रायल में किया जाता है। इन परीक्षणों के जरिए यह जांचा जाता है कि दवा शरीर में कैसे अवशोषित होती है, कैसे टूटती है और कैसे बाहर निकलती है। फरवरी में शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ मैटेरिया मेडिका ने 450 साइनोमोल्गस मकाक बंदरों की खरीद के लिए 6.2 करोड़ युआन का टेंडर जारी किया। 2023 में नेशनल इंस्टीट्यूट्स फॉर फूड एंड ड्रग कंट्रोल ने 1,70,000 युआन प्रति बंदर की दर से खरीद की थी, जब कोविड-19 वैक्सीन परीक्षण चरम पर था।
मांग-आपूर्ति का दबाव
विशेषज्ञों के मुताबिक बायोटेक कंपनियों और वैश्विक फार्मा डील्स में रिकॉर्ड वृद्धि से परीक्षण बढ़े हैं। 2025-27 के बीच सालाना 51,000 से 62,000 बंदरों की मांग रहने का अनुमान है, जबकि सप्लाई सीमित है। कई फार्म 2026 तक पूरी तरह बुक हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि बंदरों की बढ़ी कीमत से दवा विकास की कुल लागत पर सीमित असर पड़ेगा, क्योंकि क्लिनिकल ट्रायल कुल खर्च का लगभग 70% हिस्सा होता है।
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