हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: मंगलवार 01 जुलाई 2025
बागपत: बागपत में हुए एक एनकाउंटर में पुलिस ने एक लाख रुपये के इनामी हिस्ट्रीशीटर संदीप पहलवान उर्फ संदीप लोहार को मार गिराया। पुलिस और एटीएस नोएडा की संयुक्त कार्रवाई में यह मुठभेड़ 29 जून की रात ग्राम मवीकलां में यमुना के पुश्ता क्षेत्र में हुई। एनकाउंटर में संदीप के फरार साथी की तलाश अभी जारी है। पुलिस ने मौके से हथियारों का बड़ा जखीरा और एक बिना नंबर की बाइक बरामद की है।
पोस्टमार्टम व मजिस्ट्रेट जांच:
संदीप का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा मजिस्ट्रेट की निगरानी में किया गया। इस प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, संदीप को दो गोलियां लगीं — एक सीने में और दूसरी पैर में, दोनों ही पार हो गईं। उसके बाद परिजनों ने शव की शिनाख्त की और उसे लेकर रोहतक रवाना हो गए। इस एनकाउंटर की मजिस्ट्रेटी जांच भी होगी।
क्या मिला पुलिस को:
पुलिस ने संदीप के पास से .32 बोर और 7.62 बोर की पिस्टल, 315 बोर का तमंचा, कुल 15 कारतूस, कई खोखे, एक कपड़े का बैग, ड्राइविंग लाइसेंस, 5500 रुपये नकद, एक हेलमेट और यामाहा एफजेड बाइक बरामद की है। पुलिस का दावा है कि संदीप अपने गिरोह के साथ मिलकर ट्रक चालकों की हत्या कर माल लूटता था और उस रात भी बागपत क्षेत्र में ट्रक लूट की साजिश में था।
परिवार का आरोप: “गांव से उठाकर मुठभेड़ में मारा गया”
संदीप के पिता सत्यवीर सिंह ने मर्चरी पर मीडिया से कहा कि उनका बेटा संदीप निर्दोष था और तीन बेटियों व एक दो माह के बेटे का पिता था। वे बोले, “संदीप गांव में भूसे के ट्रक चलाता था और गरीबों की मदद करता था। तीन महीने से त्वचा की एलर्जी का इलाज करा रहा था और रविवार को ही गांव लौटा था। शाम चार बजे तक गांव में देखा गया, लेकिन रात 11 बजे उसकी एनकाउंटर की खबर वायरल हो गई।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने संदीप को गांव से उठाकर फर्जी मुठभेड़ में मारा है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर न्याय नहीं मिला तो विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा और अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
मुकदमों की संख्या 21 तक पहुंची
पुलिस के अनुसार, संदीप पर हत्या, लूट, डकैती और चोरी जैसे गंभीर आरोपों के तहत पहले 16 मुकदमे दर्ज थे, जो अब बढ़कर 21 हो गए हैं। इनमें से चार मामलों में वह ट्रक चालकों की हत्या कर चुका था।
जांच और सवाल जारी
इस मुठभेड़ के बाद कई सवाल उठे हैं — क्या यह मुठभेड़ असली थी या संदीप को निशाना बनाकर मारा गया? प्रशासन और जांच एजेंसियों की पारदर्शिता व निष्पक्षता पर अब जनता और परिवारजन की नजर है।