अलीगढ़।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
UGC Act को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्टे आदेश का UGC Act विरोध संघर्ष मंच ने स्वागत किया है। कोर्ट द्वारा मामले में 19 मार्च को अगली सुनवाई की तिथि तय किए जाने के बाद मंच ने अपने सभी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। मंच ने कहा कि न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करते हुए आंदोलन अब लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
मशाल जुलूस स्थगित, सांकेतिक आयोजन
आज प्रस्तावित मशाल जुलूस को स्थगित करते हुए मंच के सभी पदाधिकारी धर्म समाज महाविद्यालय परिसर में एकत्र हुए। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे आदेश के लिए आभार व्यक्त किया गया और सांकेतिक रूप से मशाल जलाकर आंदोलन में सहयोग देने वाले सभी साथियों का धन्यवाद किया गया। मंच ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास का प्रतीक है।

नेतृत्व की प्रतिक्रियाएं
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुमित शिब्बोजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मंच स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि आगामी सुनवाई में छात्रों के हित सुरक्षित होंगे।
मंच के प्रमुख अरविंद पंडित ने कहा कि यह लड़ाई शिक्षा और छात्रों के भविष्य से जुड़ी है। सभी संगठन एकजुट हैं और अपना मांग पत्र जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर शैलेंद्र सिंह ने कहा कि अगला न्यायिक निर्णय आने तक आंदोलन सांकेतिक रूप से चलता रहेगा। कोई उग्र प्रदर्शन नहीं किया जाएगा और जन-जागरण अभियान के जरिए आम जनता को इस कानून के प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

कार्यकर्ताओं की व्यापक भागीदारी
कार्यक्रम में सर्व ब्राह्मण महासभा, राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें अमित पंडित वात्सल्य, राहुल पंडित, अखिल पाण्डेय, प्रमोद शर्मा, विवेक प्रताप सिंह, वीरांगना भावना चौहान, स्नेहलता चौहान, कविता राघव, अनीता सिंह, मीरा जादौन, युवराज सिंह, चेतन राणा, संदीप चौहान, बंटी जादौन, घनश्याम सिंह सहित अनेक नाम शामिल रहे।
आगे की रणनीति
मंच ने साफ किया कि विरोधात्मक कार्यक्रम भले ही स्थगित हैं, लेकिन नुक्कड़ बैठकों, जनसंवाद और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से संघर्ष शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा। मंच को विश्वास है कि 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में न्यायपालिका छात्रों और देश की शिक्षा व्यवस्था के हित में न्यायपूर्ण निर्णय देगी।
















