नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
भारतीय नागरिकों के निजता के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मेटा और व्हाट्सऐप के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अगर व्हाट्सऐप और मेटा उपयोगकर्ताओं का निजी डाटा साझा कर रहे हैं, तो उन्हें इसका स्पष्ट और ठोस हलफनामा दाखिल करना होगा, अन्यथा देश छोड़ने के लिए तैयार रहना होगा। अदालत ने कहा कि भारत के संविधान के तहत मिले निजता के अधिकार से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जा सकता।
“संविधान का मजाक नहीं बनने देंगे”
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने व्हाट्सऐप की 2021 की निजता नीति पर तीखी टिप्पणी की। सीजेआई ने कहा कि मेटा और व्हाट्सऐप ने अपनी शर्तें इतनी जटिल और चालाकी से तैयार की हैं कि एक आम नागरिक उन्हें समझ ही नहीं पाता। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की नीतियां संविधान का मजाक उड़ाने के समान हैं, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निजी अनुभव का जिक्र
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने अपना निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति व्हाट्सऐप पर डॉक्टर को यह लिख दे कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है और डॉक्टर दवा सुझा देता है, तो कुछ ही मिनटों में उसी दवा से जुड़े विज्ञापन ई-मेल और यूट्यूब पर दिखने लगते हैं। अदालत ने सवाल उठाया कि यह सब कैसे होता है और क्या यह डाटा साझा करने का सबूत नहीं है।
जुर्माने और अपील का मामला
सुप्रीम कोर्ट मेटा और व्हाट्सऐप एलएलसी की उस अपील पर सुनवाई कर रही है, जिसमें उन्होंने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के फैसले को चुनौती दी है। एनसीएलएटी ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा व्हाट्सऐप की 2021 की निजता नीति पर लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को सही ठहराया था। वहीं, सीसीआई ने भी अलग से अपील दाखिल कर मेटा और व्हाट्सऐप को डाटा साझा करने की अनुमति दिए जाने पर आपत्ति जताई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कार्रवाई
इसी बीच, फ्रांस की राजधानी पेरिस में अभियोजकों ने बाल यौन सामग्री और डीपफेक से जुड़े मामलों की जांच के तहत एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के कार्यालयों पर छापेमारी की। यह जांच बच्चों से जुड़े अपराधों और ऑटोमेटेड डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम में कथित हेरफेर से संबंधित है।
निजता पर बड़ा संदेश
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी तकनीकी कंपनियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि भारत में व्यापार करना है तो कानून और नागरिकों की निजता का सम्मान करना ही होगा।













