हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 29 अप्रैल: 2025,
मनमानी फीस वृद्धि से मिलेगी निजात
दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर एक अहम फैसला लिया गया और फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए कच्चा मसौदा तैयार किया गया है। अब इस बिल को जल्द ही विधानसभा में लाकर कानून की शक्ल दी जाएगी।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस
दिल्ली सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस मसौदे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी स्कूलों को 31 जुलाई तक अपनी प्रस्तावित फीस तय करनी होगी और 15 सितम्बर तक इसे स्कूल लेवल कमेटी में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
फीस निर्धारण प्रक्रिया: तीन स्तरों पर होगी समीक्षा
स्कूल द्वारा प्रस्तावित फीस पहले स्कूल लेवल कमेटी, फिर जिला स्तर और अंत में राज्य स्तर की कमेटी के पास जाएगी। यह प्रक्रिया 30 से 45 दिनों में पूरी की जाएगी। अक्टूबर से नवम्बर के बीच पैरेंट्स को स्पष्ट रूप से पता चल जाएगा कि आगामी सत्र में कितनी फीस देनी है।
फीस नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना
अगर कोई स्कूल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फीस नहीं लेता या मनमाने तरीके से फीस बढ़ाता है, तो उस पर ₹1 लाख से लेकर ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, अगर कोई स्कूल फीस न दे पाने की स्थिति में किसी बच्चे को कक्षा से बाहर बैठाता है, तो ₹50,000 प्रति बच्चा जुर्माना देना होगा।
1973 के कानून में नहीं था ऐसा प्रावधान
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि 1973 के एक्ट में फीस वृद्धि को नियंत्रित करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। पिछली सरकारों ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य भाजपा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
1 अप्रैल 2025 से होगा कानून लागू
सरकार ने कैबिनेट में इस बिल को मंजूरी दे दी है और इसे जल्द विधानसभा में पेश कर कानून बनाया जाएगा। यह नया कानून 1 अप्रैल 2025 से लागू माना जाएगा।
पैरेंट्स को मिलेगा निर्णायक अधिकार
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस कानून के तहत माता-पिता को पहली बार इतनी शक्तियां मिलेंगी जिससे वे अपने बच्चों के भविष्य के निर्णय में भागीदारी निभा सकेंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस मसले पर विधानसभा की एक विशेष बैठक जल्द बुलाई जाएगी।













