तेलंगाना में पशु क्रूरता का भयावह मामला
तेलंगाना में नए साल के पहले दो हफ्तों के भीतर करीब 500 आवारा कुत्तों की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि कई गांवों में कुत्तों को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया। यह कार्रवाई कथित तौर पर स्थानीय चुनावों के दौरान किए गए “कुत्ते-मुक्त गांव” के वादे को पूरा करने के लिए की गई। मामला सामने आते ही पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया और इसे पशु क्रूरता के सबसे गंभीर मामलों में गिना जा रहा है।

ग्राम प्रधानों समेत 15 लोगों पर केस
तेलंगाना पुलिस ने इस मामले में जांच तेज करते हुए हनमकोंडा और कामारेड्डी जिलों के सात ग्राम प्रधानों सहित कुल 15 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। पुलिस के अनुसार, यह राज्य के इतिहास में पशु क्रूरता के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक है। आरोप है कि आवारा कुत्तों से परेशान ग्रामीणों को राहत देने के नाम पर यह अमानवीय कदम उठाया गया।
चुनाव में किया गया था कुत्ते हटाने का वादा
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में हुए ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान कई उम्मीदवारों ने आवारा कुत्तों के हमलों से डरे लोगों से “कुत्ते-मुक्त गांव” का वादा किया था। इसी के बाद बीते दो हफ्तों में बड़े पैमाने पर कुत्तों को जहर देकर मारने की घटनाएं हुईं। 12 जनवरी 2026 को स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया से जुड़े एनिमल क्रुएल्टी प्रिवेंशन मैनेजर अदुलापुरम गौतम ने माचारेड्डी थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई।
कैमरे में कैद हुआ जहर का इंजेक्शन
जगतियाल जिले के धर्मपुरी नगरपालिका क्षेत्र से एक डरावना वीडियो सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति कुत्ते को घातक इंजेक्शन लगाता दिख रहा है। वीडियो में इंजेक्शन लगते ही एक मिनट के भीतर कुत्ता गिर पड़ता है और सड़क पर दो अन्य कुत्तों के शव भी दिखाई देते हैं। वहीं, हनमकोंडा के श्यामपेटा इलाके से 110 कुत्तों के शव बरामद किए गए हैं, जिनमें से कुछ का पोस्टमार्टम कराया गया है।
सरकार और सुप्रीम कोर्ट सख्त
तेलंगाना सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी आवारा कुत्तों के खतरे पर चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि कुत्तों को मारना गैरकानूनी है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।













