अलीगढ़, 01 सितम्बर 2025।
प्रदेश सरकार ने बासमती चावल की गुणवत्ता और इसके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी धीरेन्द्र सिंह चौधरी ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश के 30 जिलों में 60 दिन की अवधि के लिए 11 कीटनाशकों की बिक्री, वितरण और प्रयोग पर रोक लगा दी गई है।
प्रतिबंधित जिलों में आगरा, अलीगढ़, औरेया, बागपत, बरेली, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, एटा, कासगंज, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, मथुरा, मैनपुरी, मेरठ, मुरादाबाद, अमरोहा, कन्नौज, मुजफ्फरनगर, शामली, पीलीभीत, रामपुर, सहारनपुर, शाहजहांपुर और सम्भल शामिल हैं।
प्रतिबंधित कीटनाशकों में ट्राईसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपाइरीफास, हेक्साकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफास, इमिडाक्लोप्रिड, कार्वोफ्यूरॉन एवं कार्वेण्डाजिम शामिल हैं। इनका उपयोग रोकने का उद्देश्य यह है कि बासमती चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार की गुणवत्ता मानकों पर खरा उतर सके।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे इन प्रतिबंधित रसायनों के स्थान पर वैकल्पिक कीटनाशकों का प्रयोग करें। उदाहरण स्वरूप, ट्राईसाइक्लाजोल के स्थान पर साइफनोकोनाजोल 25% ईसी या स्यूडोमोनास 0.5% डब्ल्यूपी, बुप्रोफेजिन के स्थान पर कार्बोसल्फान 25% ईसी, बाईफेन्थ्रिन 10% ईसी या फिप्रोनिल 5% एसपी, एसीफेट के स्थान पर ऐसीटामिप्रिड 20% एसपी, क्लोरपाइरीफास के स्थान पर क्लोरोथायोनिल अथवा बाईफेन्थ्रिन तथा प्रोपिकोनाजोल के स्थान पर डाइफेनोकोनाजोल 25% ईसी का प्रयोग किया जा सकता है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे इन वैकल्पिक उपायों को अपनाकर न केवल अपनी उपज को नुकसान से बचाएं, बल्कि गुणवत्तायुक्त बासमती चावल उत्पादन में भी सहयोग दें। इससे प्रदेश का बासमती निर्यात और किसानों की आय दोनों में बढ़ोतरी होगी।















