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भारत का दो टूक संदेश: कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं, पाकिस्तान को खाली करना होगा POK; तुर्किए को भी सख्त लहजे में चेताया

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ 22 मई : 2025

नई दिल्ली, 22 मई 2025 — भारत ने गुरुवार को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कश्मीर को लेकर की गई मध्यस्थता की पेशकश और तुर्किए द्वारा पाकिस्तान के समर्थन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) को लेकर ही बातचीत होगी। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की कोई आवश्यकता नहीं है।

ट्रंप की ओर से फिर से कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात कहे जाने पर विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि यह भारत का आंतरिक मामला है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,

“मैंने पहले भी स्पष्ट किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी विषय पर बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय होगी। किसी तीसरे देश की इसमें कोई भूमिका नहीं है। और यह भी स्पष्ट कर दें कि बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते।”

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर किसी भी प्रकार की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब केवल एक लंबित मुद्दा बचा है—पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए भारतीय क्षेत्र को खाली कराना।

“पाकिस्तान से केवल POK को खाली करने के मुद्दे पर बात होगी और उसको यह खाली करना ही होगा,” उन्होंने दो टूक कहा।

भारत ने पाकिस्तान के पक्ष में खड़े तुर्किए को भी तीखे शब्दों में चेतावनी दी। प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि तुर्किए को आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर भारत की चिंताओं को समझना चाहिए और पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद करने के लिए दबाव बनाना चाहिए।

“हम उम्मीद करते हैं कि तुर्किए पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद करने और दशकों से पोषित आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र के खिलाफ ठोस, विश्वसनीय और सत्यापन योग्य कार्रवाई करने का दृढ़तापूर्वक आग्रह करेगा,” उन्होंने कहा।

प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय संबंध एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता पर आधारित होते हैं। भारत ऐसे किसी भी देश के साथ संबंधों में प्रगति नहीं देखता जो उसकी संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देने वाले तत्वों का समर्थन करता है।

भारत ने हाल के वर्षों में स्पष्ट रूप से यह नीति अपनाई है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा। चाहे वह सीमा पार आतंकवाद हो, POK पर दावा हो या वैश्विक मंचों पर कश्मीर का मुद्दा—भारत हर मोर्चे पर अपना पक्ष स्पष्टता और दृढ़ता से रख रहा है।

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