हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ शुक्रवार 30 मई 2025
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शहरी विकास के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के नगर विकास विभाग और देश के प्रतिष्ठित संस्थान स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), दिल्ली के बीच एक अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) बुधवार को लखनऊ में हस्ताक्षरित किया गया। यह साझेदारी टाटा ट्रस्ट के सहयोग से ‘आकांक्षी नगर योजना’ के तहत की गई है।
इस एमओयू का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के स्थानीय नगर निकायों को शहरी नियोजन के क्षेत्र में सशक्त बनाना और वहां कार्यरत अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देना है। समझौते के तहत छोटे और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में सुनियोजित विकास, पर्यावरण-संतुलन, संस्कृति संरक्षण और सुव्यवस्थित बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लखनऊ के नगरीय निकाय निदेशालय में आयोजित इस कार्यक्रम में नगर विकास विभाग के सचिव अजय कुमार शुक्ला, निदेशक अनुज कुमार झा, एसपीए दिल्ली के निदेशक प्रो. वीरेंद्र कुमार पॉल, टाटा ट्रस्ट की शिखा श्रीवास्तव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदेश में 760 से अधिक शहरी स्थानीय निकाय हैं, जिनमें से कई छोटे नगरों में अभी भी प्रशिक्षित शहरी योजनाकारों की भारी कमी है। यह एमओयू इन नगर निकायों को वैश्विक मानकों के अनुसार योजना बनाने और लागू करने में सक्षम बनाएगा।
नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने कहा,
“यह समझौता इस बात का प्रमाण है कि सरकार प्रदेश के हर शहर को विकास की दौड़ में आगे लाना चाहती है, चाहे वो छोटा हो या बड़ा।”
एसपीए दिल्ली के निदेशक प्रो. वीरेंद्र कुमार पॉल ने इस समझौते को एक राष्ट्रीय मॉडल बताया और कहा,
“यह पहल न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकती है। इससे एक ऐसा समूह तैयार होगा जो पर्यावरण के अनुकूल और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहरों का निर्माण करेगा।”
इस साझेदारी के तहत अधिकारियों को निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा:
नगरीय योजना एवं ढांचा विकास, जल आपूर्ति और स्वच्छता, सड़क और यातायात योजना, कचरा प्रबंधन एवं ठोस अपशिष्ट निपटान, सार्वजनिक स्थलों की डिजाइनिंग, डिजिटल एवं स्मार्ट सिटी अवधारणा,
सरकार का लक्ष्य: योजनाबद्ध, समावेशी और टिकाऊ विकास
योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि हर नागरिक को बेहतर जीवन सुविधाएं मिलें और प्रदेश के शहर “रहने लायक”, “सुव्यवस्थित” और “आकर्षक” बनें। टाटा ट्रस्ट का वित्तीय सहयोग इस पूरी योजना को व्यावहारिक और प्रभावी बनाएगा।













