हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: मंगलवार 24 जून 2025 लखनऊ
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) से निष्कासित बागी विधायक मनोज पांडेय के जल्द ही उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इसकी रणनीति पहले से तय हो चुकी है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व से उन्हें आश्वासन भी मिला है। पांडेय वर्तमान में रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं।
सपा ने सोमवार को तीन विधायकों को पार्टी से निष्कासित किया, जिनमें मनोज पांडेय का नाम शामिल है। सूत्रों का कहना है कि पांडेय विधानसभा से इस्तीफा देकर उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर उतर सकते हैं। जीतने की स्थिति में उन्हें सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव में की थी क्रॉस वोटिंग
मनोज पांडेय उन आठ सपा विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की या मतदान से अनुपस्थित रहे। इनमें से केवल पांडेय ने ही अब तक भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। पांडेय ने अपना राजनीतिक सफर स्थानीय निकाय चुनाव से शुरू किया था और वे चार बार विधायक रह चुके हैं। वे 2004-07 और 2012-17 की सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। सपा में उन्हें राष्ट्रीय सचिव, प्रदेश उपाध्यक्ष और विधानसभा में मुख्य सचेतक जैसी अहम जिम्मेदारियां मिली थीं।
भाजपा की रणनीति और आश्वासन
सपा से निष्कासन के बाद पांडेय दल-बदल कानून के दायरे से मुक्त हो गए हैं। इसके बावजूद, सूत्रों के अनुसार, वे विधानसभा से इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें टिकट और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का आश्वासन दिया है। भाजपा की रणनीति है कि सपा के टिकट पर जीते विधायक को सीधे अहम पद देने से गलत संदेश न जाए।
दारा सिंह चौहान का उदाहरण
इससे पहले, कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान के मामले में भी यही रणनीति अपनाई गई थी। चौहान 2022 में सपा के टिकट पर घोसी से विधायक बने थे, लेकिन भाजपा में शामिल होने और मंत्री पद का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उपचुनाव में उनकी हार हुई, जिसके बाद भाजपा ने उन्हें विधान परिषद भेजकर मंत्री बनाया।