हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
नई दिल्ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा ईदगाह विवाद पर स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा किने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू मानस में काशी, मथुरा और अयोध्या का विशेष महत्व है—दो जन्मभूमि और एक निवास स्थान।
भागवत ने यह बातें “100 साल की संघ यात्रा – नए क्षितिज” कार्यक्रम के समापन अवसर पर कहीं। इस कार्यक्रम में आए लोगों के 218 सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या आंदोलन अपवाद था, जिसमें संघ अंत तक जुड़ा रहा, लेकिन भविष्य में संगठन सीधे तौर पर आंदोलनों में शामिल नहीं होगा।
संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज को समझदारी दिखाते हुए स्वेच्छा से काशी और मथुरा हिंदुओं को सौंप देना चाहिए। उनके अनुसार, यह केवल तीन स्थलों की बात है और इन्हें देने से भाईचारा व सामाजिक सौहार्द और मजबूत होगा।
भागवत ने दो टूक कहा—“हर जगह मंदिर मत ढूंढो, हर जगह शिवलिंग मत खोजो। सिर्फ काशी, मथुरा और अयोध्या ही हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2019 में अयोध्या मामले के फैसले के बाद संघ ने काशी-मथुरा पर आंदोलन न करने का ऐलान किया था, लेकिन अब स्वयंसेवक अपनी व्यक्तिगत इच्छा से इन आंदोलनों में शामिल हो सकते हैं।