हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़, 4 सितम्बरः राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के अंतर्गत नेत्र बैंक, नेत्र विज्ञान संस्थान, जेएन मेडिकल कॉलेज एएमयू के सहयोग से दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, अलीगढ़ में नेत्रदान जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में योगदान ही सच्ची सामुदायिक सेवा है। उन्होंने नेत्रदान को सबसे बड़ा मानवीय कार्य बताते हुए सभी से इससे जुड़ने की अपील की।
नेत्र बैंक के प्रभारी डॉ. एम. साकिब ने कहा कि नेत्रदान के लिए केवल पखवाड़े तक सीमित न रहकर वर्ष भर सतत प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. एम.के. माथुर और अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश खत्री के सहयोग की सराहना की। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में लगभग 1.2 मिलियन (12 लाख) लोग कॉर्नियल अंधत्व से पीड़ित हैं और हर साल करीब 25 से 30 हजार नए मामले जुड़ जाते हैं। देश में हर साल लगभग एक लाख कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है, जबकि मौजूदा समय में केवल 25 से 30 हजार प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं।
देह दान संस्था के प्रतिनिधि डॉ. एस.के. गौड़ ने संस्था की ओर से नेत्र व शरीरदान को प्रोत्साहित करने में निभाई जा रही भूमिका पर प्रकाश डाला और कहा कि एक दानकर्ता दो लोगों की रोशनी लौटा सकता है। डॉ. रैना गर्ग (नेत्र विज्ञान संस्थान) ने नेत्रदान से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर जानकारी दी और भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने कहा कि अगर डोनर कॉर्निया की उपलब्धता बढ़े तो लाखों लोगों को रोशनी मिल सकती है।
संगोष्ठी का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समाज में लगातार जन-जागरूकता फैलाकर, नेत्रदान की प्रतिज्ञाओं को बढ़ावा दिया जाएगा और कॉर्नियल अंधत्व को समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।















