हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़, 19 सितम्बरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के फारसी विभाग में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित पाँच दिवसीय “ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर एकेडमिक नेटवर्क (ज्ञान) कोर्स” सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विषय था – भारत में फारसी साहित्य के आयामों की समझ। इस कार्यक्रम ने छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों को फारसी साहित्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर पर विमर्श का अवसर दिया।

उद्घाटन समारोह कुलपति प्रो. नईमा खातून की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ ने फारसी भाषा के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला। विशेष योगदान ईरान की यज़्द यूनिवर्सिटी के प्रो. मोहम्मद काज़ेम केहदुई का रहा। उन्होंने व्याख्यानों और इंटरैक्टिव सत्रों में शास्त्रीय कविता, गद्य, सूफी साहित्य और भारत में फारसी भाषा के प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने शिक्षार्थियों को “ज्ञान के बगीचे का फूल” बताया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. आज़रमी दुक़्त सफावी (सलाहकार, इंस्टिट्यूट ऑफ फारसी रिसर्च) रहीं। विशिष्ट अतिथि प्रो. मोहम्मद रिजवान खान (कार्यवाहक डीन, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स) और विशेष अतिथि प्रो. राना खुरशीद (पूर्व अध्यक्ष, फारसी विभाग) ने भाग लिया। प्रो. एम. जे. वारसी और प्रो. केहदुई के योगदान को सम्मानित किया गया।
फैकल्टी सदस्यों – प्रो. एस. एम. असद अली ख़ुरशीद, प्रो. मोहम्मद उस्मान ग़नी, डॉ. मोहम्मद कैसर, डॉ. क़मर आलम, डॉ. अहमद नवेद यासिर, डॉ. एहतशामुद्दीन, डॉ. फ़ौज़िया वहीद और डॉ. हिना इस्हाक़ ने आयोजन में सहयोग किया। शोधार्थियों व छात्रों ने पेपर प्रेजेंटेशन और चर्चाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।
इस ज्ञान कोर्स ने एएमयू के फारसी विभाग की 1877 से चली आ रही परंपरा को पुनः सुदृढ़ किया, जो इंडो-फारसी विरासत को संरक्षित करने और छात्रों को वैश्विक अकादमिक नेटवर्क से जोड़ने में सदैव अग्रणी रहा है।















