हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
डीएसटी-प्रायोजित स्तुति प्रोग्राम की सफल समाप्ति के अवसर पर एएमयू द्वारा समग्र संकलन जारी
अलीगढ़, 24 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी अवसंरचना का उपयोग करते हुए सामंजस्यपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम (ैस्तुति) के सफल समापन का दस्तावेजीकरण करते हुए एक समग्र संकलन जारी किया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा वित्तपोषित था। संकलन का औपचारिक विमोचन कुलपति प्रो. नइमा खातून ने प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान, सहकुलपति, प्रो. अनिसुल ए. उस्मानी, अध्यक्ष, भौतिकी विभाग और प्रो. बी. पी. सिंह, कोऑर्डिनेटर, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) की उपस्थिति में किया।
प्रो. नइमा खातून ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि संकलन एएमयू की वैज्ञानिक क्षमता निर्माण और शोध उत्कृष्टता के प्रति स्थिर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि स्तुति प्रोग्राम ने देश भर के छात्रों और शोधकर्ताओं को प्रेरित किया, व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया, नवाचार को बढ़ावा दिया और युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में करियर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
सहकुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने कार्यक्रम की सावधानीपूर्वक योजना और निष्पादन की प्रशंसा की और इसे अकादमिक दृष्टि और संस्थागत समर्पण का आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि भौतिकी विभाग ने प्रतिभागियों के कौशल और वैज्ञानिक जिज्ञासा को सशक्त करने में नेतृत्व दिखाया।
विज्ञान संकाय के डीन प्रो. सरताज तबस्सुम ने कहा कि स्तुति और विज्ञान जागरूकता सप्ताह जैसी पहल केवल अकादमिक तक सीमित नहीं हैं। ये प्रतिभागियों को आलोचनात्मक सोचने, नवाचार करने और समाज के लाभ के लिए विज्ञान लागू करने के लिए प्रेरित करती हैं।
अध्यक्ष प्रो. अनिसुल ए. उस्मानी ने कार्यक्रम की समावेशी दृष्टि की सराहना की, विशेष रूप से महिलाओं और वंचित या दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभागियों तक इसके पहुँच को उजागर किया। पीएमयू कोऑर्डिनेटर प्रो. बी. पी. सिंह ने कहा कि 300 से अधिक प्रतिभागियों को उन्नत अनुसंधान उपकरणों तक पहुँच और वैज्ञानिक विधियों की गहन समझ प्राप्त करने का अनुभव अत्यंत संतोषजनक रहा।
संकलन में 10 विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम और सात दिवसीय विज्ञान जागरूकता सप्ताह का दस्तावेजीकरण शामिल है, जो हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में आयोजित किए गए थे। प्रतिभागियों ने नैनोप्रौद्योगिकी, न्यूक्लियर फिजिक्स, लिक्विड क्रिस्टल फिजिक्स, क्वांटम ऑप्टिक्स, बायोइमेजिंग और उन्नत प्रायोगिक तकनीकों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में आयोजित किए गए, जिनमें एएमयू, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, श्रीनगर, बरेली कॉलेज, बरेली, लखनऊ विश्वविद्यालयय इलाहाबाद विश्वविद्यालय, कालीकट विश्वविद्यालयय और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद शामिल हैं। यह सहयोग एएमयू की वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आउटरीच में राष्ट्रीय नेतृत्व को उजागर करता है।
डीएसटी द्वारा लगभग 1.15 करोड़ रूप्ये के अनुदान के साथ प्रायोजित परियोजना बजट के भीतर सफलतापूर्वक पूरी की गई। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने परियोजना के समापन को औपचारिक रूप से मंजूरी दी, एएमयू की दक्षता, पारदर्शिता और राष्ट्रीय वैज्ञानिक लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की।
संकलन विमोचन समारोह में प्रो. इसार ए. रिजवी, प्रो. शकील अहमद, प्रो. शाहिद हुसैन, प्रो. तुफैल अहमद, प्रो. शकेब अहमद, प्रो. वसी खान, डॉ. जय प्रकाश, डॉ. सुधीर के. गुप्ता, डॉ. मोहम्मद शुएब, अकिब सिद्दीक और समवील अंसारी सहित संकाय सदस्य उपस्थित रहे। —————————
एएमयू में दो दिवसीय ‘सफाई मित्र सुरक्षा शिविर’ का उद्घाटनः स्वच्छता ही सेवा-2025 अभियान के तहत कैंपस की सफाई के अपरिचित नायकों का सम्मान
अलीगढ़, 24 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रव्यापी स्वच्छता ही सेवा-2025 अभियान के तहत दो दिवसीय ‘सफाई मित्र सुरक्षा शिविर’ का आयोजन किया गया है। यह पहल एएमयू के सफाई कर्मचारियों, जो विश्वविद्यालय के परिसर में स्वच्छता और स्वास्थ्य बनाए रखने वाले अग्रिम प्रहरी हैं, की भूमिका को पहचानने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को उजागर करती है।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन सहकुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने प्रो. हम्माद उस्मानी, निदेशक एमएएस, और डॉ. एम. सलमान शाह, उप-निदेशक एमएएस की उपस्थिति में किया। उद्घाटन सत्र में प्रो. नेहा अग्रवाल, चेयरपर्सन, डिपार्टमेंट ऑफ पीरियोडॉन्टिक्स एंड कम्युनिटी डेंटिस्ट्री और डॉ. अब्दुल्लाह, डिपार्टमेंट ऑफ ऑप्थलमोलॉजी के अलावा शिक्षक, कर्मचारी और छात्र भी उपस्थित रहे। 100 से अधिक सफाई मित्र और उनके परिवारों ने शिविर में सक्रिय भागीदारी दिखाई।
प्रो. खान ने सफाई कर्मचारियों का योगदान को सराहते हुए उन्हें विश्वविद्यालय के “अनसुने नायक” बताया, जिनकी अथक सेवा सभी के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि यह शिविर केवल आभार का प्रतीक नहीं है, बल्कि सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के प्रति एएमयू की जिम्मेदारी की पुनः पुष्टि भी है।
विश्वविद्यालय स्वास्थ्य कार्यालय और मेडिकल अटेंडेंस स्कीम द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम का ध्यान स्वास्थ्य जागरूकता, व्यावसायिक सुरक्षा और कल्याण उपायों पर था। इसमें कम्युनिटी मेडिसिन विभाग, ओटो-राइनो-लैरिंजोलॉजी (ईएनटी), इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी और पीरियोडॉन्टिया एवं कम्युनिटी डेंटिस्ट्री विभाग के विशेषज्ञों द्वारा सफाई कर्मियों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और विशेषज्ञ परामर्श प्रदान किया गया।
विश्वविद्यालय स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अली जाफर आब्दी ने कार्यक्रम में सहयोग देने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित विभागों का धन्यवाद किया और कहा कि सफाई मित्र सुरक्षा शिविर जैसी पहलों से एएमयू की समावेशी सोच और संस्थान की प्रगति में हर सदस्य के योगदान की मान्यता झलकती है।
इस प्रकार, अपने सफाई कर्मचारियों का सम्मान और देखभाल करके एएमयू सामुदायिक सहभागिता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत करता है, और एक स्वस्थ, स्वच्छ और समावेशी कैंपस वातावरण बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
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एएमयू स्कूलों में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के अवसर पर आध्यात्मिक सभाएं और इंटर-स्कूल प्रतियोगिताएं आयोजित
अलीगढ़, 24 सितंबरः ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जश्न के अंतर्गत, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के स्कूलों में पैगंबर मुहम्मद साहब के उत्कृष्ट जीवन और शिक्षाओं से परिचित करने के लिए आध्यात्मिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं की एक श्रृंखला का आयोजन किया गया। छात्रों ने नात, किरत, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी भक्ति व्यक्त की, जो इस अवसर की आध्यात्मिक भावना को दर्शाती थीं।
एसटीएस स्कूल में आयोजित इंटर-स्कूल नात ख्वानी प्रतियोगिता में एएमयू के विभिन्न स्कूलों के प्रतिभाशाली छात्रों ने भाग लिया। भावपूर्ण प्रस्तुतियों के बाद, नूरुल मदार (एसटीएस स्कूल) और हुसैफा राशिद (आरएमपीएस एएमयू सिटी स्कूल) ने पहला पुरस्कार साझा किया। अदीबा (एएमयू एबीके हाई स्कूल गर्ल्स) ने दूसरा पुरस्कार जीता, जबकि मोहम्मद जोकैन (एसटीएस स्कूल) और आलिया (एएमयू सिटी गर्ल्स हाई स्कूल) ने तीसरा पुरस्कार साझा किया।
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य फैसल नफीस ने कहा कि ईद-ए-मिलाद-उन-नबी हमें पैगंबर के शाश्वत संदेश, शांति, दयालुता और सहानुभूति की याद दिलाता है। उन्होंने छात्रों की भक्ति की प्रशंसा की। कार्यक्रम का संचालन सैयद इकराम हैदर जाफरी ने किया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. मोहम्मद इरफान ने प्रस्तुत किया।
एएमयू एबीके हाई स्कूल (गर्ल्स) में भी एक विशेष सभा आयोजित की गयी, जिसमें कक्षा 10 की छात्राओं ने पैगंबर साहब के उत्कृष्ट गुणों और उनके साथियों द्वारा उनके प्रति प्रेम और सम्मान को दर्शाने वाले भाषण और नात प्रस्तुत किए। कार्यक्रम ने ईद-ए-मिलाद-उन-नबी की वास्तविक भावना को प्रकट किया और छात्रों को उनकी शिक्षाओं का पालन करने के लिए प्रेरित किया। प्रधानाचार्य डॉ. सबा हसन ने छात्रों के साथ एक संवादात्मक सत्र में अर्थपूर्ण संदेश साझा किया।
एएमयू गर्ल्स स्कूल में प्रिंसिपल आमना मलिक और उप-प्रधानाचार्य अलका अग्रवाल के कुशल मार्गदर्शन में अंतर-विद्यालय निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया। सांस्कृतिक समन्वयक जेबा नवाज ने कार्यक्रम की समर्पित रूप से योजना तैयार की, और इवेंट इंचार्ज नुसरत परवीन, जावेद आलम और डॉ मोहम्मद आलम ने सहयोग प्रदान किया।
इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों में आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना, लेखन कौशल को निखारना और सीरत-उन्नबी के प्रति जागरूकता फैलाना था। विभिन्न एएमयू स्कूलों से कुल अठारह छात्रों ने इसमें भाग लिया और “पैगंबर मोहम्मद साहब का चरित्र और नैतिकताएँ” विषय पर अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू में अपने विचार व्यक्त किए।
अब्दुल्लाह स्कूल में एएमयू स्कूलों के बीच इंटर-स्कूल नात और किरत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। नात प्रतियोगिता में जोया अनीस (एएमयू सिटी गर्ल्स हाई स्कूल) ने पहला स्थान प्राप्त किया, हमजा कलीम (एसटीएस स्कूल) ने दूसरा और काजिम खान (एएमयू एबीके हाई स्कूल बॉयज) ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। किरत प्रतियोगिता में मोहम्मद जैद वसीम (एएमयू एबीके हाई स्कूल बॉयज) पहले, हमाद आलम (अब्दुल्लाह स्कूल) दूसरे और सफिया (एएमयू सिटी गर्ल्स हाई स्कूल) तीसरे स्थान पर रहे।
कार्यक्रम का समन्वय स्कूल अधीक्षक उमरा जहीर और शीबा सिद्दीकी ने किया, और इसमें स्कूल स्टाफ मोहम्मद मेराजुद्दीन, अना फातिमा और अर्शिया अफताब का सहयोग शामिल रहा।
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एएमयू डेंटल कालिज के ओरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी विभाग ने आईएएफओसीओएन 2025 में कई पदक जीते
अलीगढ़, 24 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. जेड ए डेंटल कॉलेज के ओरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी विभाग ने गुजरात के गांधीनगर में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय और 22वीं राष्ट्रीय भारतीय फोरेंसिक ओडोंटोलॉजी एसोसिएशन सम्मेलन (आईएएफओसीओएन 2025) में प्रमुख सम्मान और पुरस्कार प्राप्त किए।
एएमयू के प्रतिनिधिमंडल ने न केवल प्रभावशाली शोध प्रस्तुत किया, बल्कि अकादमिक योगदान के लिए भी अलग पहचान बनाई। विभागाध्यक्ष प्रो. प्रदुमन वर्मा ने “इफेक्ट ऑफ फायर ऑन मॉर्फोलॉजी एंड हिस्टोलॉजी ऑफ ह्यूमन टीथः ऐनइ न विट्रो स्टडी” शीर्षक से फैकल्टी डेलीगेट श्रेणी में बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवार्ड प्राप्त किया। यह अध्ययन आग से संबंधित फोरेंसिक मामलों में मानव दांतों के निदानात्मक महत्व की जांच करता है।
पोस्टग्रेजुएट श्रेणी में, डॉ. सिदरा असलम (जेआर तृतीय) ने अपने शोध “एस्टिमेशन ऑफ नॉन-मीट्रिक रुट ट्रेट्स इन वेस्टर्न उत्तर प्रदेश पापुलेशन यूजिंग एएसयूडीएएस स्कोरिंग ऑन सीबीसीटीः ए पायलट स्टडी” प्रस्तुत किया, जिसमें कॉन बीम कंप्यूटेड टोमोग्राफी की क्षमता को जनसंख्या-आधारित फोरेंसिक डेटाबेस बनाने में प्रदर्शित किया गया। उनके अकादमिक योगदान की सराहना की गई। विभाग की उपलब्धियों में और वृद्धि करते हुए, डॉ. असलम और डॉ. सहला बतूल (जेआर द्वितीय) दोनों को इंडियन बोर्ड ऑफ फोरेंसिक ओडोंटोलॉजी की फैलोशिप प्रदान की गई, जो इस क्षेत्र में पेशेवर विशेषज्ञता और समर्पण को मान्यता देती है।
प्रो. वर्मा ने कहा कि ये सम्मान संकाय और छात्रों दोनों की मेहनत और समर्पण को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक ओडोंटोलॉजी, जो भारत में अभी विकासशील है, उम्र निर्धारण, आपदा पीड़ित पहचान और काटने के निशान या दांतों के अवशेषों के विश्लेषण जैसी मेडिको-लीगल जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आईएएफओसीओएन 2025 में एएमयू के ओरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी विभाग की उपलब्धियों ने न केवल इसकी टीम की अकादमिक क्षमता को उजागर किया, बल्कि देश में फोरेंसिक विज्ञान को आगे बढ़ाने में विश्वविद्यालय की व्यापक भूमिका को भी दर्शाया।
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एएमयू द्वारा बिल्डिंग विभाग के लिए नए मेंबर-इंचार्ज और एसोसिएट मेंबर-इंचार्ज नियुक्त
अलीगढ़, 24 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मलिक शोएब अहमद को बिल्डिंग विभाग का मेंबर-इन-चार्ज और इसी विभाग के प्रो. रिजवान अहमद खान को एसोसिएट मेंबर-इंचार्ज नियुक्त किया है।
इन नियुक्तियों की अवधि दो वर्ष या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रहेगी और ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हैं।
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आरएमपीएस एएमयू सिटी स्कूल में फिशिंग जागरूकता पर इंटरैक्टिव सत्र आयोजित
अलीगढ़, 24 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग द्वारा कक्षा 12 के छात्रों के लिए आरएमपीएस एएमयू सिटी स्कूल में “फिशिंग जागरूकता” पर एक इंटरैक्टिव जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, ताकि डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों के बारे में उन्हें शिक्षित किया जा सके।
इस सत्र में छात्रों को फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल हाइजीन से परिचित कराया गया। इसमें आकर्षक प्रस्तुतियाँ, रोलप्ले गतिविधियाँ, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और क्विज शामिल थे। रिसोर्स टीम ने बताया कि फिशिंग स्कैम कैसे काम करते हैं, संदिग्ध ईमेल और संदेशों में चेतावनी संकेत क्या होते हैं, और व्यक्तिगत एवं वित्तीय जानकारी की ऑनलाइन सुरक्षा का महत्व समझाया।
शुरुआती संबोधन में प्रधानाचार्य सैयद तनवीर नबी ने स्कूल के बच्चों में साइबर सुरक्षा जागरूकता की तात्कालिक आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट बहुत अवसर प्रदान करता है, लेकिन फिशिंग और साइबरक्राइम जैसे वास्तविक खतरों को भी सामने लाता है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस विभाग का धन्यवाद किया कि उन्होंने यह कार्यक्रम शुरू कर छात्रों तक विशेषज्ञ ज्ञान पहुँचाया।
कार्यक्रम में फिशिंग के प्रकारों पर इंटरैक्टिव प्रस्तुतियाँ, खतरों की पहचान और उनसे निपटने के लिए रोलप्ले गतिविधियाँ, फिशिंग तकनीकों का लाइव डेमोंस्ट्रेशन और सुरक्षा उपाय, तथा प्रश्नोत्तर सत्र शामिल थे। छात्रों ने ऑनलाइन सतर्क रहने और अपने साथियों व परिवार में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
इस कार्यक्रम का संचालन अतिथि शिक्षक डॉ. फराज मसूद और पीएचडी स्कॉलर माज शमीम के मार्गदर्शन में किया गया, टीम में तमीम अख्तर, मोहम्मद अयान, अरबाब अहमद, प्रारंभ पंडित, मोहताशिम रियाज और मोहम्मद असजद शामिल थे।
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एएमयू विमेंस कॉलेज में स्वच्छता पखवाड़े के अंतर्गत स्वच्छता और स्वास्थ्य पर व्याख्यान आयोजित
अलीगढ़, 24 सितंबरः स्वच्छता पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विमेंस कॉलेज द्वारा “स्वच्छता, प्रतिरक्षा विकास और हाइजीन हाइपोथीसिस” विषय पर एक व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. अली जाफर आब्दी, यूनिवर्सिटी हेल्थ ऑफिसर, एएमयू, मुख्य वक्त के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य, प्रो. मसूद अनवर अलवी के नेतृत्व में शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जिसमें शिक्षक, कार्यालय स्टाफ, सहायक कर्मचारी और छात्रों ने स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण की सुरक्षा का संकल्प लिया। प्रो. अलवी ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया और डॉ. आब्दी को आभार का प्रतीक प्रस्तुत किया।
अपने व्याख्यान में डॉ. आब्दी ने स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया और बताया कि कैसे ऐतिहासिक रूप से अस्वच्छता और गंदे अभ्यास जानलेवा महामारी का कारण बने। उन्होंने तीन आर रिडयूज़, रीयूज, रीसाइकिल, सही हाथ धोने की तकनीक और अतीत की महामारियों को रोकने के लिए सावधानीपूर्ण उपाय जैसे व्यावहारिक कदम बताए। आंकड़ों और सांख्यिकीय चित्रों के माध्यम से उन्होंने अस्वच्छता के कारण होने वाली बीमारियों के गंभीर प्रभाव को दर्शाया और छात्रों से पर्यावरण और स्वच्छता संबंधित मुद्दों में सक्रिय और जागरूक रहने का आग्रह किया।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. नाजिश बेगम और डॉ. सदफ फरीद ने किया, जबकि छात्रा मरयम और जोहा कार्यक्रम की प्रस्तुति में कम्पेयर के रूप में शामिल रहीं।
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एएमयू में 5वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह का आयोजन
अलीगढ़, 24 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में “आपकी सुरक्षा, बस एक क्लिक दूरः पीवीपीआई को रिपोर्ट करें” विषय के तहत 5वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रमों में शैक्षणिक गतिविधियाँ, जागरूकता अभियान, रचनात्मक प्रतियोगिताएँ और सामुदायिक सहभागिता शामिल थीं, जिनका उद्देश्य दवा सुरक्षा, जिम्मेदाराना दवा उपयोग और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। यह आयोजन भारतीय फार्माकोपिया आयोग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुरूप किया गया।
सप्ताह की शुरुआत मिंटो सर्किल स्कूल में फार्माकोविजिलेंस पर संवेदनशीलता व्याख्यान से हुई, जिसके बाद पीवीपीआई पर संगोष्ठी और रेसिडेंट डॉक्टरों के लिए एंटी-ट्यूबरकुलर थेरेपी-जनित प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (एडीआरएस) पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया।
औपचारिक उद्घाटन समारोह में प्रो. मोहम्मद हबीब रजा, डीन, चिकित्सा संकाय एवं प्राचार्य एवं सीएमएस, जेएन मेडीकल कालिज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मयंक पाठक, आईपीएस, एएसपी अलीगढ़) मानद अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उद्घाटन के बाद अस्पताल परिसर के चारों ओर एक वॉकथॉन आयोजित किया गया, जिसमें आम लोगों को कार्यक्रम से जोड़ा गया।
सप्ताह भर विभिन्न कार्यक्रम छात्रों, रोगियों और व्यापक समुदाय को संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए। ओपीडी, ट्रॉमा सेंटर और डेंटल कॉलेज में जागरूकता सत्र हुए, और इब्ने सीना एकेडमी में फार्माकोविजिलेंस प्रकाशनों की प्रदर्शनी लगाई गई। भारतीय पीडियाट्रिक अकादमी (आईएपी), अलीगढ़ के सहयोग से होटल लेमन ट्री में एडीआर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। फार्माकोलॉजी के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों ने पोस्टर बनाने और क्विज प्रतियोगिताओं में भाग लिया, और “एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (।डत्) और वन हेल्थरू वैक्सीन की भूमिका” विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। छैै स्वयंसेवकों ने एएमयू कैंपस में नाटक “दवा का दुष्परिणाम” प्रस्तुत किया, जबकि महिला महाविद्यालय के पास छैै कैंपस में “ड्रग साइड इफेक्ट्स” नाटक मंचित किया गया, जिसमें दवाओं, टीकों और चिकित्सा उपकरणों के जोखिम को दर्शाया गया और रोगियों, परिवारों और स्वास्थ्य पेशेवरों को ।क्त् टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800-180-3024) और आधिकारिक ।क्त् च्अच्प् मोबाइल एप के माध्यम से रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इसी क्रम में, शिक्षा विभाग ने 22 सितंबर को अपने छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। सुबह के सत्र में स्लोगन लेखन और पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिनका मूल्यांकन डॉ. नूरा अब्दुल कादिर और डॉ. मोहम्मद हनीफ अहमद ने किया। दोपहर में अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसे उसी पैनल ने जज किया और कार्यक्रम का संचालन तैय्यबा अख्तर और उफुक हया ने किया। सत्रों में प्रो. निकहत नसरीन (चेयरपर्सन), डॉ. मोहम्मद हनीफ अहमद (प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर) और प्रो. साजिद जमाल (सीनियर प्रोफेसर) उपस्थित रहे। विजेताओं में रिफाह मुजम्मिल, सना हफीज, मारया इकबाल, लाइबा फारूकी, हुदा सुल्तान, जैनब नसीम, तैय्यबा अख्तर, मोहम्मद सफवान और सना अमानुल्लाह शामिल थे, जिनकी उपलब्धियों को समापन सत्र में मान्यता दी गई।
एएमयू गर्ल्स स्कूल ने भी आमना मलिक, प्रिंसिपल, और अलका अग्रवाल, उप-प्रधानाचार्य के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया। जेबा नवाज के समन्वय और नौशाबा यास्मीन एवं फर्रुख शमिम के आयोजन में स्कूल के कार्यक्रम में वाद-विवाद प्रतियोगिता, पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता, वॉकथॉन, नुक्कड़ नाटक, निबंध लेखन और क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्रों ने सभी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया और दवा सुरक्षा, एडीआरएस और जिम्मेदार दवा उपयोग के बारे में अपनी समझ रचनात्मक रूप से प्रदर्शित की।
विजुअली चैलेंज्ड छात्रों के लिए अहमदी स्कूल ने सप्ताह भर का आयोजन किया, जिसमें सुबह की सभा में व्याख्यान, बैनरों के साथ वॉकथॉन और “मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन” (प्रो. असमा परवीन, मनोविज्ञान विभाग) और “सीएमई और सीपीई जागरूकता” (डॉ. समीना अहमद, कम्युनिटी मेडिसिन, जेएनएमसी) पर विशेष व्याख्यान शामिल थे।
एएमयू-व्यापी समापन समारोह में अरुण यादव, आईएस (अतिरिक्त आयुक्त) उपस्थित रहे, जिन्होंने रोगी सुरक्षा और दवा निगरानी में एडीआर रिपोर्टिंग के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. मोहम्मद हबीब रजा ने फार्माकोविजिलेंस टीम के समर्पित प्रयासों की सराहना की। वरिष्ठ शिक्षक प्रो. मोहम्मद शमीम, प्रो. कामरान अफजल और प्रो. प्रदुमन वर्मा का सहयोग के लिए सम्मान किया गया, जबकि डॉ. अब्दुल सादिक खान, डॉ. मोहम्मद यमन और डॉ. अजीथ जेवियर को अधिकतम एडीआर रिपोर्टिंग के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। पोस्टर निर्माण, क्विज, स्लोगन, भाषण और अन्य स्कूल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुरभि जैन और डॉ. गजुला संध्या वाणी ने किया, और धन्यवाद प्रस्ताव में सभी प्रतिभागियों, समन्वयकों, शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों के योगदान की सराहना की गई। राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 2025 की व्यापक गतिविधियों ने एएमयू की समग्र शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता और सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाया, और छात्रों, स्वास्थ्य पेशेवरों और समुदाय को फार्माकोविजिलेंस और सुरक्षित दवा प्रथाओं के महत्व के प्रति सफलतापूर्वक संवेदनशील बनाया।
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एएमयू सीईसी द्वारा युवाओं में नशा मुक्त जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन
अलीगढ़, 24 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र (सीईसी) के क्लब फॉर शॉर्ट ईवनिंग कोर्सेज के तत्वाधान में “नशा मुक्त युवा” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य युवाओं को नशा मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना और स्वदेशी भारत अभियान को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में नशा मुक्त युवा शपथ भी शामिल थी, जिसने छात्रों की स्वस्थ और जिम्मेदार जीवन शैली के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत किया।
मुख्य अतिथि, एएमयू सहकुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समयोचित प्रयास बताया, जो छात्रों को तनाव-रहित, नशा मुक्त और अवसाद मुक्त जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने छात्रों के माता-पिता के प्रति आज्ञाकारिता और जवाबदेही को गुणवत्तापूर्ण जीवन की आधारशिला बताया।
मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. रियाज अहमद ने नशे के सामाजिक प्रभावों पर सारगर्भित प्रस्तुति दी और छात्र परामर्श पहल के लिए निरंतर समर्थन की प्रतिबद्धता जताई।
माननीय अतिथि डॉ. चित्रंजन सिंह ने छात्रों को मोबाइल और डिजिटल तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया और अपने साथियों में नशा और शराब की समस्याओं पर छोटे क्लिप बनाने व साझा करने की सलाह दी। सुन्नी धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद राशिद ने धार्मिक शिक्षाओं में हानिकारक आदतों पर रोक का महत्व बताया और नशा मुक्ति के लिए जमीनी स्तर से प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया।
शहीद बगदाद वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष मौलाना अज्जाम मिया कादरी ने कहा कि आध्यात्मिक केंद्रों की भूमिका सकारात्मक सामाजिक व्यवहार के निर्माण में महत्वपूर्ण होती है और खानकाहों और अन्य धार्मिक संस्थानों के माध्यम से चलाए जाने वाले अभियान जाति या लिंग की परवाह किए बिना प्रभाव डाल सकते हैं।
शिया धर्मशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. असगर अजाज कयामि ने धार्मिक ग्रंथों और हदीस के हवाले से पदार्थों के दुरुपयोग पर ईश्वरीय निषेध पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत में सीईसी के समन्वयक प्रो. मोहम्मद नवेद खान ने अतिथि वक्ताओं का स्वागत करते हुए छात्रों की छिपी प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने में मंच की भूमिका पर प्रकाश डाला और सीईसी के आयोजनों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
सीएसईसी के अध्यक्ष डॉ. अहमद मुजतबा सिद्दीकी ने अलीगढ़ आंदोलन की प्रासंगिकता और इसके सामाजिक प्रभाव, विशेष रूप से छात्रों के करियर और व्यक्तित्व विकास में योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का समापन अतिथि वक्ताओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।
कार्यक्रम की एक विशेष आकर्षक प्रस्तुति एएमयू ड्रामा क्लब द्वारा एंटी-ड्रग एब्यूज जागरूकता पर आधारित लघु नाटक थी, जिसने दर्शकों, जिसमें एएमयू कार्यकारी परिषद के सदस्य, प्रिंसिपल, संकाय सदस्य और छात्र शामिल थे, को जोड़ते और शिक्षित किया।
संगोष्ठी ने जागरूकता, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और रचनात्मक अभिव्यक्ति को सफलतापूर्वक जोड़ते हुए एएमयू के युवाओं को जिम्मेदार और नशा मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।















