हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़, 9 अक्टूबर: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के सर सैयद हॉल (साउथ) के स्ट्रेची हॉल में “शिक्षा, आत्मशुद्धि और बहुलतावादी समाज” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्वानों, शिक्षकों और छात्रों ने बहुलतावादी समाज में शिक्षा और सह-अस्तित्व के नैतिक और सामाजिक आयामों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में मौलाना अब्दुस्सलाम सलफी हाफिजुल्लाह ने “बहुलतावादी समाज और इस्लाम” विषय पर कहा कि इस्लाम किसी भी रंग, जाति या भाषा के आधार पर श्रेष्ठता को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने धर्मनिष्ठा और पवित्रता के आधार पर श्रेष्ठता को महत्व देते हुए पैगंबर मुहम्मद साहब के जीवन से उदाहरण साझा किए और न्याय, सहिष्णुता तथा अच्छे आचार के महत्व पर जोर दिया।
धर्मशास्त्र विभाग के डॉ. नदीम अशरफ ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के भीतर संतुलन स्थापित करना है और नैतिक शुद्धि के बिना कोई वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अंतिम लक्ष्य आत्मशुद्धि है, जिसके बिना ज्ञान अधूरा रहता है।
जनरल वार्डन डॉ. अब्दुल अजीज खान ने एएमयू को बहुलतावाद का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने छात्रों को सकारात्मक सोच बनाए रखने, अपने वादों का पालन करने और किसी भी प्रकार की नफरत या शत्रुता से दूर रहने की सलाह दी।
अरबी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सनाउल्लाह नदवी ने अध्यक्षीय टिप्पणी में कहा कि यह संगोष्ठी समुदायिक जीवन की नैतिक और सामाजिक नींव को समझने का सार्थक अभ्यास है। उन्होंने बहुलतावाद को मानव सभ्यता की स्थायी वास्तविकता बताते हुए अंतरधार्मिक और अंतर-समुदायिक समरसता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
सर सैयद हॉल (साउथ) के प्रावोस्ट डॉ. अब्दुल रऊफ और वार्डन इंचार्ज डॉ. सफिउर रहमान ने आयोजन में सहयोग प्रदान किया। स्वागत संबोधन में अभिभाषक अब्दुल वहीद ने अतिथियों और प्रतिभागियों का अभिवादन किया और छात्रों में नैतिक और बौद्धिक चिंतन को प्रोत्साहित करने की इस पहल की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन मबरूर अशरफ ताइमी ने किया और समापन पर एसपीएम हाफिजुर्रहमान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
















