नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
भारतीय सेना ने मेक इन इंडिया अभियान के तहत एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए गोला-बारूद और हथियार प्रणालियों की आपूर्ति में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली है। यह उपलब्धि न केवल सैन्य तैयारियों को मजबूत करती है, बल्कि देश की रणनीतिक सुरक्षा को भी नई मजबूती प्रदान करती है।
लंबे युद्ध की तैयारी पर फोकस
भारतीय सेना का ध्यान अब ऐसी युद्ध प्रणालियों पर केंद्रित है, जो लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों में भी प्रभावी बनी रहें। आधुनिक युद्ध केवल हथियारों की ताकत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स और मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था भी उतनी ही अहम हो गई है। सेना का मानना है कि युद्ध की अवधि अनिश्चित होती है, इसलिए आत्मनिर्भर आपूर्ति प्रणाली बेहद जरूरी है।
वैश्विक संघर्षों से मिले सबक
हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन, अजरबैजान-अर्मेनिया और इजराइल-हमास जैसे युद्धों ने यह स्पष्ट कर दिया कि लंबे संघर्षों में विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता बड़ी चुनौती बन सकती है। इन्हीं अनुभवों से सीख लेते हुए भारतीय सेना ने स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता दी है, ताकि किसी भी वैश्विक बाधा का असर सैन्य अभियानों पर न पड़े।
200 प्रकार के गोला-बारूद, 90% स्वदेशी
भारतीय सेना विभिन्न हथियार प्रणालियों के लिए करीब 200 प्रकार के गोला-बारूद और सटीक हथियारों का इस्तेमाल करती है। नीति सुधारों और रक्षा उद्योग के साथ बेहतर समन्वय के चलते इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक अब देश में ही निर्मित किए जा रहे हैं। इससे न केवल समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है, बल्कि लागत और निर्भरता भी कम हुई है।
हजारों करोड़ के स्वदेशी ऑर्डर
मेक इन इंडिया के तहत सेना ने लगभग 16,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर पैकेज तैयार किया है। बीते तीन वर्षों में करीब 26,000 करोड़ रुपये के गोला-बारूद के ऑर्डर स्वदेशी निर्माताओं को दिए गए हैं। इससे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के रक्षा उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिला है।
भविष्य की रणनीति
आने वाले समय में सेना कच्चे माल की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने, प्रोपेलेंट और फ्यूज जैसे अहम हिस्सों के विकास, उत्पादन ढांचे के आधुनिकीकरण और कड़े गुणवत्ता मानकों पर विशेष जोर देगी। इन प्रयासों से भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा निर्माण में भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।













