हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
दिल्ली की सियासत में तेज हुई हलचल
देश की राजधानी दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही केंद्र की एनडीए सरकार बड़े बदलाव की ओर बढ़ती नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक संसद में बजट पेश होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल में अहम फेरबदल कर सकते हैं। यह बदलाव सिर्फ मंत्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में भी बड़े परिवर्तन की तैयारी है।
‘जेनरेशन शिफ्ट’ की तैयारी में बीजेपी
बीजेपी ने युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने के संकेत पहले ही दे दिए हैं। पार्टी के भीतर चर्चा है कि नितिन नवीन को जल्द ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके बाद पार्टी की नेशनल काउंसिल की बड़ी बैठक होने की संभावना है, जिसमें पूरी राष्ट्रीय टीम का पुनर्गठन किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस नई टीम में अनुभव के साथ-साथ युवा चेहरों को प्रमुखता दी जाएगी। लंबे समय से संगठन में अहम पदों पर जमे नेताओं को या तो मार्गदर्शक की भूमिका दी जा सकती है या फिर उन्हें सीधे चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है।
राज्यसभा समीकरण और छह मंत्रियों की विदाई
कैबिनेट फेरबदल की एक बड़ी वजह राज्यसभा का गणित भी है। इस साल एनडीए सरकार के छह मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिनमें से चार का कार्यकाल अप्रैल से जून के बीच समाप्त होगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इनमें से अधिकतर मंत्रियों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा और उनकी जगह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। इसे सरकार के प्रदर्शन और आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
यूपी से ब्राह्मण नेता की संभावित एंट्री
उत्तर प्रदेश की राजनीति इस कैबिनेट विस्तार का अहम केंद्र मानी जा रही है। हाल ही में यूपी में ब्राह्मण विधायकों की एक गोपनीय बैठक के बाद सियासी हलचल बढ़ गई थी। ऐसे में हाईकमान अब डैमेज कंट्रोल की रणनीति पर काम करता दिख रहा है। सूत्रों का कहना है कि यूपी से एक कद्दावर ब्राह्मण नेता, जो राज्यसभा में अपनी बेबाक और प्रभावशाली वाकपटुता के लिए पहचाने जाते हैं, उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। इसे 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जातीय संतुलन साधने की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सहयोगी दलों का भी बढ़ेगा कद
आगामी कैबिनेट विस्तार में एनडीए के सहयोगी दलों को भी साधने की तैयारी है। बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू कोटे से एक और मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं महाराष्ट्र में अजित पवार गुट की एनसीपी को भी बड़ा संदेश दिया जा सकता है। चर्चा है कि एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता, जिन्होंने पहले स्वतंत्र प्रभार का प्रस्ताव ठुकरा दिया था, अब उन्हें सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल सकता है। यह फैसला महाराष्ट्र की आगामी स्थानीय निकाय राजनीति को ध्यान में रखकर लिया जा सकता है।
आने वाले चुनावों की बिसात
कुल मिलाकर, यह संभावित फेरबदल बीजेपी और एनडीए की दीर्घकालिक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर बदलाव कर पार्टी 2027 और 2029 के चुनावों से पहले मजबूत संदेश देने की तैयारी में है।













