लखनऊ।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब भी चर्चा में बना हुआ है। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने बिना किसी व्यक्ति विशेष पर निशाना साधे संतों, योगियों और सन्यासियों की भूमिका और उनके मूल सिद्धांतों को स्पष्ट शब्दों में रखा।
धर्म और राष्ट्र से ऊपर कुछ नहीं : सीएम योगी
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक योगी, संत या सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। उसकी कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती। एक संत के लिए धर्म ही उसकी संपत्ति है और राष्ट्र उसका स्वाभिमान। उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म के विरुद्ध आचरण करते हैं, उनसे समाज को सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि कुछ तत्व धर्म की आड़ में सनातन परंपरा को कमजोर करने की साजिश रच सकते हैं।
प्रयागराज में दिखी सामाजिक समरसता
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज माघ मेले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां सामाजिक समरसता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण देखने को मिला है। संतों की तपस्या और आशीर्वाद से श्रद्धालुओं का सम्मान बढ़ा है और आस्था को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि यह समय गुलामी की मानसिकता से मुक्त होने का है और आज देश में सनातन परंपरा अपने गौरव के साथ आगे बढ़ रही है।
अयोध्या और काशी का बदला हुआ स्वरूप
सीएम योगी ने अयोध्या और काशी का उदाहरण देते हुए कहा कि आज अयोध्या में विशाल सनातन पताका फहरा रही है। वहीं काशी विश्वनाथ धाम में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने बताया कि दस वर्ष पहले जहां एक साथ दस लोग भी दर्शन नहीं कर पाते थे, आज वहां प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं।
सोनीपत दौरे पर बोले सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोनीपत के मुरथल स्थित नागे बाबा मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि भारत की सनातन विरासत में नाथ पंथ प्राचीनतम उपासना परंपराओं में से एक है, जिसने समाज को जीवन जीने की नई दिशा और प्रेरणा दी है।
















