हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
संसद में नाम आने पर दी सफाई
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा लगाए गए एपस्टीन फाइल संबंधी आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संसद सत्र के दौरान उनका नाम एपस्टीन फाइलों के संदर्भ में लिए जाने के बाद पुरी ने स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह सार्वजनिक रिकॉर्ड पर आधारित है। उन्होंने कहा कि मई 2009 से 2017 तक, जब वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत थे, उस अवधि के लगभग 30 लाख ईमेल सार्वजनिक किए जा चुके हैं। इन दस्तावेजों में उनके नाम से केवल तीन या चार बैठकों का उल्लेख है।
‘सिर्फ पेशेवर मुलाकातें थीं’
हरदीप पुरी ने कहा कि उनकी जेफ्री एपस्टीन से मुलाकातें पूरी तरह पेशेवर थीं और वे एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहते हुए हुईं। इन बैठकों का संबंध ‘इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज़्म’ और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से था। उन्होंने बताया कि उन बैठकों में कई देशों के नेता और प्रतिनिधि भी शामिल थे। कुछ ईमेल का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन उनका किसी भी आपराधिक या विवादित गतिविधि से कोई संबंध नहीं था।
रीड हॉफमैन और ‘मेक इन इंडिया’ का जिक्र
पुरी ने यह भी कहा कि उनके एक संपर्क ने उन्हें लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से मिलवाया था। एक ईमेल में उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का उल्लेख किया था, जिसमें एपस्टीन को कॉपी किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बातचीत का एपस्टीन पर लगे आरोपों या किसी आपराधिक मामले से कोई लेना-देना नहीं था।
राहुल गांधी पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी पर बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने सभी संबंधित नोट्स साझा किए हैं। इसके बावजूद उनके नाम को अनावश्यक रूप से विवाद में घसीटा जा रहा है। पुरी ने दोहराया कि उनकी भूमिका पूरी तरह पारदर्शी और आधिकारिक दायरे में थी।













