व्यापार समझौते और डेटा सुरक्षा पर उठाए सवाल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता दबाव में किया गया है और इससे देश के हितों से समझौता हुआ है। राहुल ने कहा कि अमेरिका की नजर भारत के 140 करोड़ लोगों के डेटा पर है। उनके अनुसार, यदि अमेरिका को सुपरपावर बने रहना है तो उसकी “चाबी भारतीय डेटा” है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत अमेरिकी शर्तें नहीं मानेगा तो टैरिफ फिर बढ़ा दिए जाएंगे।
बजट में डेटा और एआई पर प्रावधान नहीं
राहुल गांधी ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन बजट में डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता को लेकर कोई ठोस प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉलर को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और ऐसे समय में भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए थी। उनका कहना था कि यदि सरकार मजबूती से बातचीत करती तो डेटा संरक्षण को प्राथमिक शर्त बनाया जा सकता था।
तेल आयात और टैरिफ नीति पर चिंता
राहुल ने अमेरिका की टैरिफ नीति का जिक्र करते हुए कहा कि बांग्लादेश के टेक्सटाइल उत्पादों पर जीरो टैरिफ है, जिससे भारतीय उद्योग को नुकसान हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब अमेरिका तय करेगा कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा। उनके अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र का “हथियारीकरण” हो रहा है और यह राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा है।
‘बराबरी की बात होनी चाहिए थी’
राहुल गांधी ने कहा कि अगर उनकी सरकार होती तो अमेरिका से बराबरी के आधार पर बातचीत की जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आत्मसमर्पण कर दिया है और यह 140 करोड़ भारतीयों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश के हित सर्वोपरि होने चाहिए थे।













