दिल्ली-NCR में फ्लू जैसे लक्षणों के बढ़ते मामलों के बीच विशेषज्ञों ने दी सलाह; अचानक तेज बुखार, बदन दर्द और सांस की तकलीफ को न करें नजरअंदाज
दिल्ली-NCR में फ्लू और वायरल बुखार जैसे लक्षणों के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अस्पतालों और डॉक्टरों के क्लीनिक में बुखार, खांसी और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि सामान्य वायरल फीवर और स्वाइन फ्लू यानी H1N1 इंफ्लूएंजा में अंतर कैसे किया जाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती चरण में दोनों की पहचान केवल लक्षणों के आधार पर करना मुश्किल होता है। डॉक्टर कौशल कांत मिश्रा के अनुसार, इन्फ्लूएंजा में लक्षण अक्सर अचानक शुरू होते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द तथा अत्यधिक थकान इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं। वहीं सामान्य सर्दी-जुकाम में छींक, नाक बहना, नाक बंद होना और गले में खराश अधिक प्रमुख रहती है।
चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. आशीष जायसवाल के मुताबिक, सामान्य फ्लू, इन्फ्लूएंजा और H1N1 के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। खांसी, बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द और कमजोरी के साथ कुछ मरीजों में त्वचा पर चकत्ते भी दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में H1N1 संक्रमण निमोनिया और सांस लेने में परेशानी का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सांस फूलना, सीने में दर्द, लगातार बहुत तेज बुखार, दवा से बुखार नियंत्रित न होना, पेशाब कम होना, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या सोचने-समझने में परेशानी जैसे लक्षण गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
H1N1 की पुष्टि केवल लक्षणों से नहीं होती। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर नाक या गले से लिए गए नमूने की जांच की सलाह दे सकते हैं। डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर, गर्भावस्था या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। विशेषज्ञों ने घबराने के बजाय लक्षणों पर नजर रखने, चिकित्सकीय सलाह लेने और बचाव के लिए फ्लू वैक्सीनेशन पर विचार करने की सलाह दी है।
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