AQI 244 के पार पहुंचने से बढ़ी चिंता, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण से लेकर वाहनों की जांच तक सख्ती; GRAP के अगले चरणों में और कड़े होंगे प्रतिबंध
नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ : दिल्ली-एनसीआर में मौसम में बदलाव और हल्की ठंड के बीच वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 244 के पार पहुंचने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। बिगड़ती हवा को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू किया गया है। इसके तहत धूल और धुएं से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के साथ वाहनों, निर्माण स्थलों और औद्योगिक इकाइयों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
क्या है GRAP और कैसे काम करता है?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने की चरणबद्ध व्यवस्था है। इसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत लागू किया जाता है। इसमें वायु गुणवत्ता के स्तर के अनुसार चार चरण निर्धारित हैं। प्रदूषण बढ़ने के साथ प्रतिबंध भी सख्त होते जाते हैं, ताकि स्थिति गंभीर होने से पहले ही नियंत्रण के उपाय किए जा सकें।
पहले चरण में धूल और वाहनों पर नजर
GRAP-1 के तहत सड़कों की मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय तेज किए जाते हैं। खुले में कचरा और अन्य सामग्री जलाने पर रोक, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच तथा औद्योगिक इकाइयों में उत्सर्जन नियंत्रण पर जोर दिया जाता है।
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए एंटी-स्मॉग गन, मिस्ट स्प्रे यूनिट और तकनीक आधारित ट्रैफिक प्रबंधन का भी सहारा लिया है। बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे उपायों की भी घोषणा की गई है।
अगले चरणों में बढ़ेगी सख्ती
GRAP-2: सड़कों की नियमित मशीनों से सफाई, एंटी-स्मॉग गन से छिड़काव और सार्वजनिक परिवहन की सेवाएं बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाते हैं। डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी सख्ती की जाती है।
GRAP-3: गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर रोक लगाई जा सकती है। प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों तथा मालवाहक वाहनों पर भी प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।
GRAP-4: यह सबसे गंभीर चरण है। इसमें ट्रकों की आवाजाही, निर्माण गतिविधियों और वाहनों के संचालन पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार स्कूलों और कार्यालयों के संचालन को लेकर भी निर्णय लिए जाते हैं।
आम लोगों की भूमिका अहम
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। लोगों से निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने, कचरा नहीं जलाने और वाहनों की नियमित जांच कराने की अपील की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते प्रभावी कदम उठाने से हवा की गुणवत्ता में और गिरावट रोकने में मदद मिल सकती ह













