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धर्म परिवर्तन के बाद किसे मिलेगा आरक्षण, किसका खत्म होगा अधिकार? 5 बिंदुओं में समझें

SC, ST, OBC और EWS के नियम अलग-अलग; मुस्लिम या ईसाई बनने पर अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं, जबकि ST के मामले में धर्म परिवर्तन मात्र से दर्जा खत्म नहीं होता

नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ : धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण का लाभ मिलेगा या नहीं, यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है। हिंदू धर्म छोड़कर मुस्लिम, ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले लोगों के लिए आरक्षण के नियम उनकी सामाजिक श्रेणी और संबंधित कानूनों पर निर्भर करते हैं। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं। ऐसे में धर्म बदलने के बाद सभी का आरक्षण खत्म हो जाता है या हर किसी को इसका लाभ मिलता रहता है, ऐसा मानना सही नहीं है।

आरक्षण से जुड़े नियमों को समझने के लिए संवैधानिक प्रावधानों और संबंधित वर्ग की पात्रता पर ध्यान देना जरूरी है। आइए, पांच बिंदुओं में समझते हैं कि धर्म परिवर्तन के बाद किस वर्ग को आरक्षण का लाभ मिल सकता है और किन परिस्थितियों में यह अधिकार प्रभावित होता है।

1. SC आरक्षण: मुस्लिम या ईसाई बनने पर नहीं मिलेगा लाभ

संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 के पैरा-3 के अनुसार, अनुसूचित जाति का दर्जा हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वाले पात्र व्यक्तियों तक सीमित है। इसलिए अनुसूचित जाति से संबंधित कोई व्यक्ति इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाता है, तो वह इस दर्जे के आधार पर आरक्षण का दावा नहीं कर सकता। हालांकि, हिंदू धर्म से सिख या बौद्ध धर्म अपनाने वाले पात्र व्यक्ति अन्य निर्धारित शर्तें पूरी करने पर SC दर्जा बनाए रख सकते हैं।

2. ST आरक्षण: धर्म बदलने से अपने आप खत्म नहीं होता अधिकार

अनुसूचित जनजाति के मामले में नियम अलग हैं। ST के लिए संविधान में SC जैसी धर्म आधारित सामान्य पाबंदी नहीं है। यदि किसी अधिसूचित जनजाति का व्यक्ति मुस्लिम, ईसाई या कोई अन्य धर्म अपना लेता है, तो केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर उसका ST दर्जा अपने आप समाप्त नहीं होता। हालांकि, संबंधित जनजाति की संवैधानिक सूची में शामिल होना और लागू पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी है।

3. OBC आरक्षण: समुदाय की मान्यता सबसे अहम

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण का लाभ संबंधित समुदाय की मान्य सूची और लागू नियमों पर निर्भर करता है। केवल हिंदू से मुस्लिम बनने के आधार पर किसी व्यक्ति को स्वतः पिछड़ा मुस्लिम वर्ग का दर्जा नहीं मिल जाता। केंद्र और राज्य की OBC सूचियां अलग हो सकती हैं, इसलिए संबंधित सूची में समुदाय की स्थिति और अन्य पात्रता शर्तों की जांच आवश्यक है।

4. EWS आरक्षण: धर्म नहीं, पात्रता के नियम महत्वपूर्ण

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए केंद्र सरकार की व्यवस्था में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसका लाभ निर्धारित आर्थिक और अन्य शर्तें पूरी करने वाले पात्र लोगों को मिलता है, जो SC, ST और OBC आरक्षण के दायरे में नहीं आते। धर्म परिवर्तन मात्र से EWS की पात्रता तय नहीं होती। इसके लिए आय, संपत्ति और लागू नियमों के आधार पर पात्रता निर्धारित की जाती है।

5. अदालत के फैसले का क्या है संदेश?

धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े विवादों में अदालतें संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी पात्रता के आधार पर फैसला करती हैं। किसी एक मामले में दिया गया निर्णय सभी वर्गों पर समान रूप से लागू नहीं माना जा सकता। इसलिए आरक्षण के संबंध में निर्णय लेते समय व्यक्ति की मूल श्रेणी, संबंधित समुदाय की मान्यता और लागू कानूनों को समझना जरूरी है।

धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण का लाभ मिलेगा या नहीं, इसका कोई एक जवाब सभी पर लागू नहीं होता। SC के लिए धर्म संबंधी स्पष्ट शर्तें हैं, ST के मामले में केवल धर्म परिवर्तन से दर्जा समाप्त नहीं होता, जबकि OBC और EWS में संबंधित सूची तथा पात्रता के नियम निर्णायक होते हैं।

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