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अलीगढ़ नगर निगम निर्माण कार्य: अब थर्ड पार्टी से होगी गुणवत्ता जांच

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: 13 जुलाई 2025

अलीगढ़

महानगर में चल रहे अरबों रुपये के निर्माण कार्यों में पारदर्शिता व गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से नगर निगम ने कड़ा फैसला लिया है। अब सभी निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी जांच कराई जाएगी। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे टेंडर शर्तों और गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करें।

नगर निगम की सीमा में वर्तमान में सीएम ग्रिड, अवस्थापना, नगर निगम बोर्ड फंड, 14वें और 15वें वित्त आयोग के बजट से सड़क, नाली, पुलिया और अन्य निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने नई व्यवस्था लागू की है।

दो स्तरीय जांच व्यवस्था

नगर निगम ने तय किया है कि

₹50 लाख से अधिक लागत वाले कार्यों की थर्ड पार्टी जांच आईआईटी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) या सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई), नई दिल्ली जैसे तकनीकी संस्थानों से कराई जाएगी।

जबकि ₹50 लाख से कम लागत वाले कार्यों की जांच लोक निर्माण विभाग (PWD) करेगा।

अलीगढ़ नगर निगम में निर्माण कार्यों पर सख्ती: अब थर्ड पार्टी से होगी गुणवत्ता जांच

महानगर में चल रहे अरबों रुपये के निर्माण कार्यों में पारदर्शिता व गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से नगर निगम ने कड़ा फैसला लिया है। अब सभी निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी जांच कराई जाएगी। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे टेंडर शर्तों और गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करें।

नगर निगम की सीमा में वर्तमान में सीएम ग्रिड, अवस्थापना, नगर निगम बोर्ड फंड, 14वें और 15वें वित्त आयोग के बजट से सड़क, नाली, पुलिया और अन्य निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने नई व्यवस्था लागू की है।

ठेकेदारों के लिए सख्त नियम

अब ठेकेदारों को कार्य सूचना पत्र जारी होने के 10 दिन के भीतर परफॉर्मेंस गारंटी जमा कर अनुबंध करना अनिवार्य होगा। इसमें देरी पर ₹1000 प्रतिदिन का जुर्माना लगेगा। 30 दिन में अनुबंध न करने पर एलओए निरस्त, जमानत राशि जब्त और ठेकेदार को काली सूची में डालने की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही कार्य में देरी होने पर प्रति सप्ताह 1% के हिसाब से अधिकतम 10% तक का अर्थदंड लागू होगा।

रख-रखाव की जिम्मेदारी

सीसी और इंटरलॉकिंग सड़कों की देखरेख पांच साल तक एजेंसी को करनी होगी।

हॉटमिक्स व अन्य सिविल कार्यों की रखरखाव अवधि कम से कम दो वर्ष तय की गई है।

परियोजना लागत की 5% राशि परफॉर्मेंस गारंटी के रूप में रोकी जाएगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कद

नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि इससे निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी और कार्यों में समयबद्धता आएगी। वहीं, महापौर प्रशांत सिंघल ने इसे नगर विकास के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताया, जिससे जनता को गुणवत्ता पूर्ण सुविधाएं मिलेंगी।

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