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AMU की सभी ख़बरें सिर्फ 1 क्लिक पर 6-4-2026

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

एएमयू टीम को अभिनव खेल मैदान मार्कर के लिए किया डिजाइन पेटेंट प्राप्त

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग की एक टीम को “एडजस्टेबल पाउडर लाइन मार्कर” के डिजाइन को विकसित करने के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पंजीकरण प्राप्त हुआ है, जो खेल मैदान तकनीक में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

यह पेटेंट (डिजाइन संख्या 441119-001) पारंपरिक उपकरणों की सीमाओं को दूर करते हुए मैदान पर रेखांकन के लिए अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक पद्धति प्रस्तुत करता है। इस नवाचार के माध्यम से विभिन्न खेलों की आवश्यकताओं के अनुसार रेखाओं की चैड़ाई समायोजित की जा सकती है, कम समय में सटीकता सुनिश्चित होती है, सामग्री की बर्बादी कम होती है और एक व्यक्ति भी आसानी से बड़े मैदानों का चिन्हांकन कर सकता है।

यह परियोजना एक बहु-विषयक टीम द्वारा विकसित की गई, जिसमें ओसाफ अहमद, प्रो. सैयद तारिक मुर्तजा, डॉ. मोहम्मद शारिक, डॉ. मोहम्मद इमरान, धर्मेन्द्र कुमार, अल्ताफ अहमद, विवेक प्रकाश सिंह, नसीम हक और इरफान खान शामिल हैं। इन सभी ने उपकरण के डिजाइन, तकनीकी विकास और व्यावहारिक उपयोग में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

टीम ने बताया कि यह नवाचार “मेक इन इंडिया” और आत्म निर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप है और महंगे आयातित उपकरणों का सस्ता एवं स्वदेशी विकल्प प्रदान करता है। इसका उपयोग शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ पेशेवर खेल सुविधाओं में भी किया जा सकता है।

विभाग के शिक्षकों ने इसे खेल विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान बताते हुए एएमयू में बढ़ते नवाचार और अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

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एएमयू में टेम्पोरोमैंडिबुलर विकारों के प्रबंधन पर क्लिनिकल कार्यशाला आयोजित

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. जियाउद्दीन अहमद डेंटल कॉलेज के प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग द्वारा “टेम्पोरोमैंडिबुलर विकारों के प्रॉस्थेटिक प्रबंधन” विषय पर एक क्लिनिकल कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला इंडियन प्रोस्थोडॉन्टिक सोसाइटी, उत्तर प्रदेश शाखा के तत्वावधान में आयोजित हुई।

कार्यशाला में चेन्नई के वेंकटेश्वर डेंटल कॉलेज के प्रो. रंगराजन वेदांथम मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने टेम्पोरोमैंडिबुलर विकारों के क्लिनिकल प्रबंधन पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया और उनके प्रभावी उपचार की व्यावहारिक तकनीकों का प्रदर्शन किया।

मेडिसिन संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद खालिद तथा डॉ. जेड. ए. डेंटल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आर. के. तिवारी ने भी इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए ऐसे विकारों के प्रबंधन में उन्नत क्लीनिकल दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इससे पूर्व आयोजन अध्यक्ष प्रो. अभिनव गुप्ता ने प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि प्रो. गीता राजपूत ने विषय की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। कार्यशाला का समापन आयोजन सचिव एवं इंडियन प्रोस्थोडॉन्टिक सोसाइटी, उत्तर प्रदेश शाखा के अध्यक्ष डॉ. पंकज खराड़े द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के प्रो. पूरन चंद और प्रो. बलेंद्र प्रताप सिंह ने प्रो. रंगराजन वेदांथम को सम्मानित किया।

इस कार्यक्रम में डॉ. जेड. ए. डेंटल कॉलेज, केजीएमयू लखनऊ, सरस्वती डेंटल कॉलेज, लखनऊ तथा निजी प्रैक्टिशनर्स के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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एएमयू अंडरग्रेजुएट हिस्ट्री क्लब द्वारा सर सैयद और अलीगढ़ आंदोलन की समकालीन प्रासंगिकता पर व्याख्यान का आयोजन

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अंडरग्रेजुएट हिस्ट्री क्लब द्वारा सर सैयद अहमद खान की पुण्यतिथि के अवसर पर “सर सैयद अहमद खान और अलीगढ़ आंदोलन की समकालीन प्रासंगिकता” विषय पर एक व्याख्यान आयोजित किया गया।

यह व्याख्यान राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. मोहम्मद मोहीबुल हक द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने औपनिवेशिक काल में भारतीय समाज, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के सामने उपस्थित सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक चुनौतियों के समाधान में सर सैयद की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने आधुनिक शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संस्थागत विकास के प्रति सर सैयद के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उनकी विचारधारा की आज के समय में प्रासंगिकता पर बल दिया।

इससे पूर्व डॉ. अनीसा इकबाल साबिर ने स्वागत भाषण में ज्ञान की शक्ति पर सर सैयद के विश्वास को रेखांकित किया और छात्रों को उनके विचारों के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. हसन इमाम ने मुख्य वक्ता को सम्मानित किया और अपने समापन वक्तव्य में शिक्षा, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देने में सर सैयद के दृष्टिकोण की महत्ता को पुनः रेखांकित किया।

कार्यक्रम में डॉ. फजिला शाहनवाज और डॉ. मोहम्मद नफीस सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मोहम्मद समीर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन दानिश असलम ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अंत में सर सैयद अहमद खान के जीवन और योगदान पर आधारित एक वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया गया, जिसे विभाग के स्नातक छात्रों द्वारा तैयार किया गया था।

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एएमयू में अंतरधार्मिक संवाद और सांस्कृतिक समझ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 7-8 अप्रैल को

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा 7 और 8 अप्रैल को “विविधता को अपनानाः अंतरधार्मिक संवाद और सांस्कृतिक समझ” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया जाएगा।

विभागाध्यक्ष डॉ. आमिर रियाज के अनुसार, इस संगोष्ठी का उद्देश्य समकालीन समाज में अंतरधार्मिक संवाद और सांस्कृतिक समझ के महत्व का विश्लेषण करना है। इसमें देशभर के विद्वान, शिक्षाविद और छात्र भाग लेकर विविधता और सह-अस्तित्व से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।

उद्घाटन सत्र 7 अप्रैल को प्रातः 11.00 बजे फैकल्टी ऑफ आर्ट्स लाउंज में आयोजित होगा, जिसमें पूर्व कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज मुख्य अतिथि के रूप में अध्यक्षता करेंगे, जबकि प्रो. टी. एन. सथीशन, डीन, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स, मानद अतिथि होंगे।

संगोष्ठी में मुख्य वक्तव्य प्रो. अशोक वोहरा (पूर्व अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) द्वारा “थियोफोबिया, हिंदू धर्म और हिंदुत्व” विषय पर तथा प्रो. तारिक इस्लाम (पूर्व विभागाध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग, एएमयू) द्वारा “संस्कृति और अंतरधार्मिक संवाद की द्वंद्वात्मकता” विषय पर प्रस्तुत किए जाएंगे।

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जेएन मेडीकल कालिज की प्रो. सायरा मेहनाज एफएआईएमईआर कार्यक्रम हेतु चयनित

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की प्रो. सायरा मेहनाज का चयन मोनाश यूनिवर्सिटी मलेशिया के सहयोग से आयोजित एफएआईएमईआर असेसमेंट इंस्टीट्यूट पायलट कार्यक्रम के लिए किया गया है।

यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम दक्षता-आधारित चिकित्सा शिक्षा पर केंद्रित है, जिसमें मूल्यांकन, कार्यक्रमगत आकलन और क्लिनिकल शिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उनका चयन चिकित्सा शिक्षा में उनके योगदान तथा मेडिकल एजुकेशन यूनिट की सह-समन्वयक के रूप में उनकी भूमिका की मान्यता है।

इसके अतिरिक्त, प्रो. मेहनाज का शोधपत्र “एआई-ऑगमेंटेड इवैल्यूएशन एंड लोंगिच्युंडिनल इम्प्रूवमेंट ऑफ अ मेडिकल फाउंडेशन कोर्सः अ मिक्स्ड-मेथड्स एजुकेशनल इंटरवेंशन स्टडी” को मोनाश मलेशिया-एमएईएमएचएस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में मौखिक प्रस्तुति के लिए स्वीकृत किया गया है।

अप्रैल में आयोजित होने वाला यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें परिणाम-आधारित शिक्षा, कार्य-आधारित मूल्यांकन और फीडबैक प्रक्रियाओं में उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करेगा, जिससे शैक्षणिक और संस्थागत क्षमताओं को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।

कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष प्रो. उज्मा इरम ने प्रो. मेहनाज को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि जेएन मेडिकल कॉलेज और एएमयू की वैश्विक स्तर पर बढ़ती शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाती है।

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भारत-रूस अंतरसांस्कृतिक संबंधों पर एएमयू के प्रोफेसर को आईसीएसएसआर परियोजना प्राप्त

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा विभाग में रूसी के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुहैल अख्तर को इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) द्वारा एक शोध परियोजना प्रदान की गई है।

“उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिकाः भारत-रूस अंतरसांस्कृतिक संवाद को आकार देना” शीर्षक वाली इस परियोजना में यह अध्ययन किया जाएगा कि विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक, शैक्षिक और बौद्धिक संबंधों को किस प्रकार सुदृढ़ करते हैं।

यह परियोजना शैक्षणिक आदान-प्रदान, भाषा अध्ययन और सहयोगात्मक कार्यक्रमों की भूमिका पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगी, जो पारस्परिक समझ और स्थायी अंतरसांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करते हैं।

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फैकल्टी ऑफ मेडिसिन में दो पूर्व विभागाध्यक्षों के निधन पर शोकसभा आयोजित

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के शिक्षकों और छात्रों ने लेक्चर थियेटर-1 में एक शोकसभा आयोजित कर पैथोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राना के. शेरवानी तथा फिजियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. पी. एन. सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। अध्यक्षता मेडिसन संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद खालिद ने की।

इस अवसर पर उपस्थितजनों ने दोनों विद्वान शिक्षाविदों के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए चिकित्सा शिक्षा और विश्वविद्यालय के प्रति उनके योगदान को याद किया।

सभा में शोक प्रस्ताव पारित कर गहरा दुख व्यक्त किया गया तथा शोक संतप्त परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदनाएं प्रेषित की गईं। उपस्थित सदस्यों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना भी की।

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एएमयू में अंतरपीढ़ी संबंधों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सोशल वर्क विभाग द्वारा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस के सहयोग से अंतरपीढ़ी संबंधों पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को वृद्धावस्था से जुड़ी चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाना तथा संवाद, जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पीढ़ियों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना था।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सहकुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान उपस्थित रहे, प्रो. विभा शर्मा (सदस्य-प्रभारी, जनसंपर्क कार्यालय) और प्रो. (सेवानिवृत्त) नसीम अहमद खान अतिथि-विशेष तथा डीन, सोशल साइंसेज फैकल्टी प्रो. शेहरोज आलम रिजवी भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यानों के माध्यम से जनसंख्या संरचना में बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य और वृद्धजन देखभाल से संबंधित नीतिगत पहलुओं पर चर्चा की गई। प्रो. नसीम अहमद खान ने वृद्धावस्था के सामाजिक प्रभावों और पीढ़ियों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. एस. एम. खान ने स्वस्थ और सक्रिय वृद्धावस्था के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. शाइना सैफ ने वृद्धजनों के लिए नीतियों, अधिकारों और सामाजिक कार्यों पर चर्चा की।

समूह गतिविधियों और संवाद सत्रों के माध्यम से छात्रों को वृद्धावस्था से जुड़े वास्तविक मुद्दों, जैसे सामाजिक अलगाव और बदलती पारिवारिक संरचना, को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम का समापन फीडबैक सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए वृद्धजनों के प्रति बढ़ी जागरूकता और संवेदनशीलता को रेखांकित किया।

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एएमयू में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर राष्ट्रीय कार्यशाला-सह-एफडीपी का शुभारंभ

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पेट्रोलियम स्टडीज विभाग द्वारा आईपीएसआर सॉल्यूशन लिमिटेड के सहयोग से “शिक्षण और शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला-सह-फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारंभ किया गया, जो 10 अप्रैल तक चलेगा।

इस कार्यक्रम में देशभर से लगभग 200 प्रतिभागी, जिनमें विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य शिक्षण, अधिगम, मूल्यांकन और शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग संबंधी दक्षताओं को विकसित करना है।

कार्यक्रम के प्रत्येक दिन तकनीकी सत्रों के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, मिनी-प्रोजेक्ट्स और सहयोगात्मक अधिगम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

आयोजन अध्यक्ष एवं सचिव प्रो. अशरफ मतीन ने बताया कि इस कार्यशाला को शिक्षकों को एआई के आधुनिक उपकरणों और कौशलों से सुसज्जित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि वे उभरती प्रौद्योगिकियों को शिक्षा और शोध में प्रभावी रूप से शामिल कर सकें।

कार्यशाला में एआई के मूल सिद्धांत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से इसकी प्रासंगिकता, पाठ योजना निर्माण, परिणाम-आधारित शिक्षा, सामग्री निर्माण, एआई आधारित मूल्यांकन, शैक्षणिक प्रशासन और लर्निंग एनालिटिक्स जैसे विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही प्रतिभागियों को साहित्य समीक्षा, अकादमिक लेखन, प्लेगरिज्म जांच और जर्नल चयन के लिए एआई आधारित शोध उपकरणों से भी परिचित कराया जा रहा है।

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एएमयू के शिक्षा विभाग में राष्ट्रीय करियर काउंसलर्स कार्यशाला का उद्घाटन

अलीगढ़, 6 अप्रैलः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (सीईआरटी) और सेंटर फॉर ट्रेनिंग एंड एकेडमिक गाइडेंस (सीटीएजी) के सहयोग से राष्ट्रीय करियर काउंसलर्स कार्यशाला का उद्घाटन विभाग के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डीन, सोशल साइंसेज फैकल्टी प्रो. इकराम हुसैन उपस्थित रहे, जिन्होंने युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें उचित करियर दिशा देने में काउंसलिंग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि करियर का चयन व्यक्ति की क्षमता और रुचि के अनुरूप होना चाहिए।

सीईआरटी के निदेशक डॉ. रोशन मोहिद्दीन ने भी सभा को संबोधित करते हुए केंद्र की अनुसंधान, वंचित समुदायों और नीतिगत पहल पर केंद्रित गतिविधियों की जानकारी दी।

इससे पूर्व विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला संयोजक प्रो. निखत नसरीन ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में करियर काउंसलिंग के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

सह-संयोजक प्रो. साजिद जमाल ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें मार्गदर्शन तकनीकों, करियर योजना और व्यावहारिक कौशलों को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों की करियर मार्गदर्शन संबंधी दक्षताओं को विकसित करना है। उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. आफताब अहमद अंसारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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